What is Carbon Tax : यूरोप ने भारतीय उत्पादों पर कार्बन टैक्स लगा दिया है. आखिर यह कार्बन टैक्स क्या है और कोई देश इसे क्यों लगाता है. इसके लगाए जाने से भारत पर क्या असर होगा.
इन सवालों के जवाब देने से पहले यह समझते हैं कि यूरोप के कार्बन टैक्स लगाने से भारत को क्या नुकसान उठाना पड़ेगा. यूरोप के इस कदम के बाद भारत के लिए यह ट्रेड डील उतनी फायदे की नहीं रह जाएगी, जितनी कि हम अनुमान लगा रहे थे. यूरोप के कार्बन टैक्स लगाने से भारत के कई उत्पाद जैसे स्टील, एल्यूमिनियम और सीमेंट यूरोपीय बाजार में महंगे हो जाएंगे. इसका मतलब है कि इन उत्पादों का निर्यात उतना ज्यादा नहीं हो सकेगा, जितना कि डील से पहले अनुमान लगाया जा रहा था. यही इस डील में भारत के लिए सबसे बड़ा नुकसान है.
क्या होता है कार्बन टैक्स
दुनिया में कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग रोकने के लिए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं. इसके तहत जापान के क्योटो शहर में एक संधि हुई थी, जिसमें कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों पर टैक्स लगाने की बात कही गई थी. बाद में कुछ देशों ने उन प्रोडक्ट पर भी टैक्स लगाना शुरू कर दिया, जिनके उत्पादन में कार्बन का उत्सर्जन ज्यादा होता है. यह कार्बन कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल की वजह से निकलता है. जिन उत्पादों को बनाने में ईंधन के तौर पर इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, उसी पर कार्बन टैक्स लगाया जाता है.
कैसे लगाया जाता है कार्बन टैक्स
दुनिया में कई देशों की सरकारें प्रति टन कार्बन डाइऑक्साइड इक्विवेलेंट (CO₂e) के हिसाब से कार्बन टैक्स लगाती है. मान लीजिए अगर कोई फैक्ट्री या कंपनी 1 टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन करती है तो इससे बनने वाले उत्पाद पर प्रति टन 50 से 150 डॉलर तक कार्बन टैक्स देना पड़ेगा. इससे बचने के लिए ही कंपनियां अब सोलर, विंड जैसे ईंधन का इस्तेमाल करती हैं, ताकि कार्बन का उत्सर्जन कम हो और उनके प्रोडक्ट पर कार्बन टैक्स न लगे.
कितने देशों में लगता है कार्बन टैक्स
- अभी तक दुनिया के करीब 30 से 40 देशों ने कार्बन टैक्स लगाना शुरू कर दिया है.
- सबसे पहले इसकी शुरुआत स्वीडन ने साल 1991 में की थी, जो 118 से लेकर 134 यूरो प्रति टन तक लगाता है.
- स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टाइन भी अपने यहां आयात होने वाले सामानों पर कार्बन टैक्स लगाते हैं, जो 122 से 126 यूरो प्रति टन होता है.
- यूरोपीय देश नॉर्वे और फिनलैंड भी कई प्रोडक्ट पर 62 से 93 यूरो प्रति टन का कार्बटन टैक्स लगाते हैं.
- कनाडा में भी फेडरल और प्रोविंशियल रेट के तहत 65 से 80 कैनेडियन डॉलर प्रति टन कार्बन टैक्स लगाया जाता है.
- एशिया में पहली बार सिंगापुर ने कार्बन टैक्स लगाया, जिसने साल 2024 में 25 डॉलर लगाया गया था, लेकिन इसे बढ़ाकर 45 डॉलर तक कर दिया गया है.
- यूरोप के अन्य देशों जैसे डेनमार्क ने 100 यूरो, जर्मनी ने 55 यूरो, फ्रांस ने 44 यूरो का कार्बन टैक्स लगाया है.
- अन्य देशों जैसे ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, यूके, न्यूजीलैंड, जापान, दक्षिण अफ्रीका, मैक्सिको, चिली, अर्जेंटीना, कोलंबिया, यूक्रेन और दक्षिण कोरिया ने भी कार्बन टैक्स लगाया है.
क्यों लगता है कार्बन टैक्स
कोई भी देश कार्बन टैक्स लगाता है, ताकि कार्बन का उत्सर्जन कम किया जाए और ग्लोबल वार्मिंग कम हो. टैक्स लगाने से कार्बन उत्सर्जन को हतोत्साहित किया जाता है. जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और अन्य तरह के नुकसान को रोकना भी इसका मकसद है. कार्बन टैक्स के जरिये हरित ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाता है. कार्बन टैक्स के रूप में मिले पैसों को सरकार क्लीन एनर्जी, सब्सिडी, गरीबों को मदद आदि में इस्तेमाल करती है. कुल मिलाकर यह एक ऐसा टूल है जिससे कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले देश ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करते हैं जिसे बनाने में ज्यादा कार्बन का उत्सर्जन हुआ है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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