भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जापान के बड़े बैंक सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन यानी एसएमबीसी (SMBC) को भारत में पूरी तरह मालिकाना वाली सब्सिडियरी खोलने के लिए इन-प्रिंसिपल अप्रूवल दे दिया है.
यस बैंक में पहले से ही एसबीएमसी की 24.99 फीसदी हिस्सेदारी रखता है. अब सब्सिडियरी मॉडल को मंजूरी मिलने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या एसबीएमसी की भूमिका सिर्फ निवेशक तक सीमित रहेगी या फिर यस बैंक में उसकी हिस्सेदारी और बढ़ सकती है.
सब्सिडियरी मॉडल क्यों अहम
भारत में सब्सिडियरी के तौर पर काम करने का मतलब है कि विदेशी बैंक लंबे समय के लिए भारत में टिके रहने का संकेत देता है. इस मॉडल में फैसले भारत में ही लिए जा सकते हैं और टैक्स से जुड़े कुछ फायदे भी मिलते हैं. आरबीआई भी ऐसे बैंकों से ज्यादा स्थिर ऑपरेशन की उम्मीद करता है. अब तक भारत में सिर्फ कुछ ही विदेशी बैंकों ने यह रास्ता चुना है. हाल ही में Emirates NBD–RBL Bank डील इसका उदाहरण रही है.
Yes Bank के लिए क्या बदलेगा
SMBC की ग्रुप कंपनी SMFG India Credit पहले से भारत में सक्रिय है और रिटेल और एसएमई लोन सेगमेंट में मजबूत मानी जाती है. यह वही सेक्टर है जहां यस बैंक पिछले कुछ सालों से जूझ रहा है. अगर भविष्य में इन कारोबारों का बेहतर तालमेल होता है, तो यस बैंक की बैलेंस शीट और ग्रोथ को मजबूती मिल सकती है. हालांकि, एक्सपर्ट मानते हैं कि यह प्रक्रिया Emirates NBD-RBL डील जितनी तेज नहीं होगी, क्योंकि एसबीएमसी के भारत में कई बिजनेस पहले से मौजूद हैं,
अभी किन बातों पर रहेगी नजर
आने वाले 1-2 तिमाहियों में निवेशकों का फोकस यस बैंक की ग्रोथ रफ्तार, मौजूदा मैनेजमेंट की रणनीति और सीईओ प्रशांत कुमार का उत्तराधिकारी कौन होगा, इन बातों पर रहेगी. उनका कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म हो रहा है और यही क्लेरिटी आगे शेयर के लिए बड़ा ट्रिगर बन सकती है.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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