एटीएम का 4 अंकों वाला पिन कोई तकनीकी संयोग नहीं, बल्कि मानवीय सुविधा से जुड़ा फैसला था. एटीएम के आविष्कारक जॉन शेफर्ड-बैरन ने पहले 6 अंकों का पिन सोचा था, लेकिन पत्नी की सलाह के बाद इसे 4 अंकों का कर दिया गया और यही आगे चलकर ग्लोबल स्टैंडर्ड बन गया.
लोगों की सुविधा और याद रखने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए जॉन ने पिन को 6 से घटाकर 4 अंकों का कर दिया. यही फैसला आगे चलकर दुनिया भर में स्टैंडर्ड बन गया. 4 अंकों के पिन में 0000 से 9999 तक कुल 10,000 अलग अलग कॉम्बिनेशन बनते हैं. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी अनजान व्यक्ति के लिए सीमित कोशिशों में सही पिन का अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है. यह फैसला सुरक्षा और इंसान की याददाश्त के बीच एक संतुलन था. उस दौर की तकनीक और जरूरतों के हिसाब से यह एक परफेक्ट बैलेंस माना गया.
एटीएम का आइडिया कैसे आया
जॉन शेफर्ड-बैरन का जन्म 1925 में भारत के शिलांग में हुआ था. बाद में वह ब्रिटेन में पले बढ़े. वह पेशे से इंजीनियर नहीं थे, बल्कि डे ला रू नाम की कंपनी में काम करते थे, जो नोट छापने का काम करती थी.
एटीएम का विचार उन्हें एक साधारण सी घटना से आया. एक दिन वह बैंक से पैसे निकालने पहुंचे, लेकिन बैंक बंद हो चुका था. उसी रात उन्हें ख्याल आया कि जब वेंडिंग मशीन में सिक्का डालने पर चॉकलेट बाहर आ सकती है, तो ऐसी मशीन क्यों नहीं हो सकती जिसमें चेक डालने पर पैसे निकल आएं.
उन्होंने अपना आइडिया बार्कलेज बैंक के सामने रखा और बैंक ने इसे स्वीकार कर लिया. 27 जून 1967 को लंदन में दुनिया का पहला एटीएम लगाया गया, जिसने बैंकिंग की दुनिया बदल दी.
क्या आज भी 4 अंकों का PIN ही चलता है
आज तकनीक काफी आगे बढ़ चुकी है. कई देशों और बैंकों में अब 6 अंकों का पिन अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे संभावित कॉम्बिनेशन 10,000 से बढ़कर 10 लाख हो जाते हैं. इससे सुरक्षा का स्तर और मजबूत हो जाता है. हालांकि, भारत समेत दुनिया के बड़े हिस्से में अब भी 4 अंकों का पिन सबसे ज्यादा प्रचलित है, क्योंकि यह याद रखने में आसान है और आम उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधाजनक भी.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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