खास बात यह है कि शुरुआती कारोबार में आईटी (IT) सेक्टर को छोड़कर बाकी सभी 15 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे. मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी दबाव में हैं और इनमें 1 फीसदी तक की गिरावट देखी गई. पिछले कुछ समय से एआई की वजह से दबाव झेल रहे आईटी शेयरों में आज निचले स्तरों से खरीदारी दिखी है, जिससे इन्फोसिस जैसे शेयर 2 फीसदी तक चढ गए हैं. आज बाजार में बिकवाली हावी रहने के पांच प्रमुख कारण हैं. आइये दलाल स्ट्रीट के इन ‘खलनायकों’ के बारे में जानते हैं.
वैश्विक बाजारों का असर
अमेरिकी बाजार में चिप निर्माता एनवीडिया (Nvidia) के नतीजे घोषित होने के बाद बिकवाली का माहौल बना. हालांकि कंपनी ने शानदार आय दर्ज की, लेकिन निवेशकों की ऊंची उम्मीदों के कारण शेयर 5.5 प्रतिशत गिर गया. इसका असर पूरे वैश्विक सेमीकंडक्टर और टेक शेयरों पर पड़ा. इसी के चलते जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी जैसे एशियाई बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए, जिसका सीधा दबाव भारतीय बाजार पर पड़ा.
FII की बिकवाली
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली है. गुरुवार को ही विदेशी निवेशकों ने 3,465.99 करोड़ रुपये के शेयर बाजार से निकाले. जब विदेशी फंड्स बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हैं, तो इससे घरेलू बाजार में लिक्विडिटी कम होती है और बाजार की धारणा कमजोर हो जाती है.
इंडिया VIX में उछाल
बाजार में कितनी घबराहट है, इसका अंदाजा ‘इंडिया VIX’ (India VIX) को देखकर लगाया जा सकता है. आज इसमें 3 फीसदी का उछाल आया है, जो 13.44 के स्तर पर पहुँच गया. वीआईएक्स में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि निवेशक आने वाले समय में बाजार में और अस्थिरता देख रहे हैं.
भू-राजनीतिक तनाव
मध्य-पूर्व (Middle-East) से आ रही खबरों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है. अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला है. विशेषज्ञों को डर है कि वार्ता विफल होने से तनाव बढ़ सकता है और अमेरिका-ईरान संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है. ऐसी वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक रिस्की एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं.
रुपये में कमजोरी
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया आज 4 पैसे कमजोर होकर 90.95 के स्तर पर पहुंच गया. एफआईआई की बिकवाली और शेयर बाजार की गिरावट रुपये पर दबाव बना रही है. रुपये का कमजोर होना आयात को महंगा बनाता है और विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को कम आकर्षक बनाता है, जिससे बिकवाली का सिलसिला और तेज हो जाता है.
क्या और गिरेगा बाजार?
जार विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए 25,300 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट की तरह काम करेगा. यदि निफ्टी इस स्तर के नीचे फिसलता है, तो गिरावट और गहरा सकती है. वहीं, तेजी की पुष्टि के लिए निफ्टी को 25,670 के स्तर को पार करना होगा. फिलहाल विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और केवल चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी पर विचार करना चाहिए, क्योंकि बाजार ट्रायंगल फॉर्मेशन और कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है.
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