LPG Vs PNG : देश में इस समय एलपीजी को लेकर काफी हो-हल्ला हो रहा है. सरकार ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के वेटिंग टाइम को भी बढ़ा दिया है. इससे लोगों में घबराहट है और गैस एजेंसियों के सामने कतारें लग रही हैं. लेकिन, खास बात यह है पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को लेकर कहीं कोई दिक्कत नहीं है. यह लोगों को आराम से मिल रही है. ऐसा क्यों है?
सरकार कह चुकी है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है फिर भी बहुत से लोग घबराए हुए है. (प्रतीकात्मक फोटो : एआई)
भारत में एलपीजी की किल्लत और पीएनजी की निर्बाध आपूर्ति के पीछे तीन मुख्य कारण हैं. पहला, दोनों ही गैस की वितरण प्रणाली में मूलभूत अंतर है. दूसरा, एलपीजी के मुकाले पीएनजी के मामले में भारत आयात पर कम निर्भर है और तीसरा और सबसे बड़ा कारण, दोनों ही गैस के उपयोगकर्ताओं की संख्या में जमीन-आसमान का अंतर है. इन्हीं वजहों से जहां एक ओर एलपीजी को लेकर मारामारी मची हुई है, वहीं पीएनजी बिना किसी दिक्कत के अभी तक लोगों को मिल रही है. आइये हम विस्तार से इन तीनों कारणों को समझते हैं.
ट्रक बनाम पाइपलाइन
एलपीजी और पीएनजी के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके वितरण के तरीके यानी लॉजिस्टिक्स का है. एलपीजी वितरण व्यवस्था काफी जटिल है. बंदरगाहों से गैस बॉटलिंग प्लांट तक आती है. फिर सिलेंडर भरे जाते हैं और फिर से ट्रक आदि वाहनों में लादकर गोदामों तक पहुंचाए जाते हैं. गोदामों से लोगों के घरों तक डिलीवरी होती है. इस पूरी प्रणाली में कहीं भी थोड़ी सी दिक्कत आने पर ही एलपीजी की सप्लाई पर बुरा असर पड़ता है, जिसका नतीजा किल्लत के रूप में सामने आता है.
इसके विपरीत, पीएनजी भूमिगत स्थायी पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए सीधे रसोई तक पहुंचती है. इसमें न तो सड़क यातायात का झंझट है, न बॉटलिंग की देरी और न ही गैस बुक कराने का झंझट. पाइपलाइन में गैस का प्रवाह निरंतर बना रहता है. इसी वजह से वर्तमान में पीएनजी मिलने में लोगों को कोई दिक्कत नहीं है.
आयात पर निर्भरता
भारत अपनी जरूरत का 60% से अधिक LPG आयात करता है. इसमें से लगभग 90% आयात उसी हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है, जो इस समय युद्ध जैसी स्थिति के कारण बेहद संवेदनशील बना हुआ है. आयातित गैस की कमी का सीधा असर सिलेंडरों की उपलब्धता पर पड़ रहा है.
वहीं, पीएनजी के मामले में भारत काफी हद तक आत्मनिर्भर है. देश अपनी जरूरत की लगभग 50% प्राकृतिक गैस खुद पैदा करता है. इसके अलावा सरकार ने आवासीय पीएनजी को सर्वोच्च प्राथमिकता (Top Priority) श्रेणी में रखा है. संकट गहराने पर सरकार ने पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक प्लांटों की गैस काटकर भी घरेलू पाइपलाइन में आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आम आदमी का चूल्हा जलता रहे.
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