कम सप्लाई: पिछले 5 सालों से दुनिया में उतनी चांदी जमीन से निकल नहीं रही है, जितनी इस्तेमाल हो रही है.
चीन फैक्टर: चीन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा चांदी उत्पादक है. उसने 1 जनवरी 2026 से चांदी के एक्सपोर्ट पर कड़ी पाबंदी लगा दी हैं, इससे पूरी दुनिया में चांदी के लिए हाहाकार है.
ग्रीन एनर्जी: एक सोलर पैनल, एक इलेक्ट्रिक कार और एक AI चिप बनाने में काफी मात्रा में चांदी का इस्तेमाल होता है. जैसे-जैसे दुनिया पेट्रोल-डीजल छोड़ रही है, चांदी की मांग बढ़ती जा रही है. नए जमाने के सुपर कंप्यूटर और AI डेटा सेंटर्स में चांदी के सर्किट लगते हैं.
सबसे ज्यादा चांदी किसके पास?
दुनिया में चांदी का सबसे बड़ा भंडार पेरू के पास है. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और पोलैंड का नंबर.
सबसे ज्यादा जरूरत किसको?
चीन और अमेरिका चांदी के सबसे बड़े खरीदार हैं. चीन इसका इस्तेमाल सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने में करता है, जबकि अमेरिका अपनी इंडस्ट्री और डिफेंस के लिए चांदी का स्टॉक कर रहा है.
भारत कहां खड़ा है
भारत दुनिया में चांदी का सबसे बड़ा इंपोर्टर है. हमें अपनी जरूरत का लगभग 90% हिस्सा विदेशों से मंगाना पड़ता है. हम UAE, ब्रिटेन, चीन और हांगकांग से चांदी खरीदते हैं. UAE के साथ तो हमारा विशेष समझौता है.
रिच डैड, पुअर डैड के लेखक रॉबर्ट कियोसकी का मानना है कि चांदी कुछ सालों में 10 लाख प्रति किलो की कीमतें पार कर लेगी.
उन्होंने X पर पोस्ट किया,
चांदी आने वाले समय में $500 (करीब 45,000 रुपये) प्रति औंस तक जा सकती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ‘औंस’ में मापी जाती है और 1 औंस का मतलब होता है लगभग 31 ग्राम.
अगर कियोसकी की बात सच हुई और चांदी $500 प्रति औंस पहुंच गई, तो भारत में 1 किलो चांदी की कीमत का गणित कुछ ऐसा होगा:
1 ग्राम चांदी की कीमत: $500 ÷ 31 ग्राम = लगभग $16 * 1 किलो (1000 ग्राम) की कीमत: $16 × 1000 = $16,000
अगर हम 1 डॉलर की कीमत, 90 रुपए मानें तो
$16,000 × 90 = ₹14,40,000
यानी कियोसकी के मुताबिक चांदी ₹14 लाख प्रति किलो के पार जा सकती है! वो चांदी को “गरीब आदमी का सोना” कहते हैं और मानते हैं कि ये आने वाले समय में सबसे बड़ी संपत्ति बनेगी. हालांकि, उनकी चेतावनी कई बार गलत भी साबित हुई हैं, जैसे से उन्होंने 2023 में ‘सबसे बड़े क्रैश’ की बात की थी जो उस वक्त नहीं आया.
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