नितिन गडकरी ने बताया कि सड़क हादसों में 2030 तक 50 फीसदी कमी का लक्ष्य है. इसके लिए आईआईटी मद्रास में रोड सेफ्टी सेंटर, एआई सिस्टम, नए सेफ्टी फीचर्स और हाई फेटेलिटी कॉरिडोर सुधार किए जा रहे हैं.
आईआईटी मद्रास इस दिशा में कर रहा है काम.
हादसों को कम करने के लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाने की योजना है. इसमें AI-बेस्ड वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन , ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरा और सर्विलांस कैमरे शामिल हैं. ये सिस्टम हादसों का जल्दी पता लगाते हैं, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करते हैं और रीयल-टाइम रिस्पॉन्स देते हैं. कई हाई-ट्रैफिक एनएच और एक्सप्रेसवे जैसे दिल्ली-मेरठ, ट्रांस-हरियाणा आदि पर पहले से एटीएमएस लग चुका है और अब इसे सभी 4-लेन एनएच पर फैलाया जाएगा.
वाहनों को सुरक्षित बनाने के लिए मीडियम और हैवी ड्यूटी वाहनों (M2, M3, N1, N2, N3 और क्वाड्रिसाइकिल) में एक्टिव सेफ्टी फीचर्स अनिवार्य किए गए हैं. जैसे एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम , एंड्योरेंस ब्रेकिंग, व्हीकल स्टेबिलिटी फंक्शन , लेन डिपार्चर वॉर्निंग , ड्राइवर ड्राउजिनेस और अटेंशन वॉर्निंग, ब्लाइंड स्पॉट इंफॉर्मेशन और मूविंग ऑफ इंफॉर्मेशन सिस्टम शामिल हैं. नए मॉडल के लिए 1 जनवरी 2027 से और मौजूदा मॉडल के लिए 1 अक्टूबर 2027 और जनवरी 2028 से लागू होगा.
सरकार ने हाई फेटेलिटी कॉरिडोर (जिन पर सबसे ज्यादा मौतें होती हैं) की पहचान की है और वहां साइट के हिसाब से सुधार किए जा रहे हैं, जैसे ब्लैक स्पॉट ठीक करना, ट्रैफिक कैल्मिंग, साइनेज आदि. यह जानकारी सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य सभा में दी है.
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