1. ब्याज में फर्क ज्यादा हो तो फायदा
होम लोन बैलेंस ट्रांसफर तभी सही रहता है जब ब्याज दर में अंतर इतना हो कि असली बचत हो. एक्सपर्ट के मुताबिक, कम से कम 0.50 फीसदी से 1 फीसदी का अंतर देखें. छोटा अंतर अक्सर फीस और डॉक्यूमेंटेशन खर्च में खत्म हो जाता है.
2. पहले सालों में फायदा ज्यादा
होम लोन के पहले सालों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है. इसलिए अगर आप लोन के शुरुआती सालों में हैं, तो ट्रांसफर करने से कुल ब्याज कम हो सकता है.
3. बेहतर शर्तों की चाहत
कभी-कभी सिर्फ ब्याज ही कारण नहीं होता, कुछ लोग EMI कम करना चाहते हैं या लोन जल्दी चुकाना चाहते हैं. कुछ बैंक रोजाना घटते हुए बैलेंस पर ब्याज या आसान प्रीपेमेंट ऑप्शन भी देते हैं.
4. क्रेडिट स्कोर सुधरा हो तो मौका
अगर आपका क्रेडिट स्कोर पहले से बेहतर हो गया है (750+), तो आप बेहतर दर पा सकते हैं. कई बार आपका मौजूदा बैंक भी दर कम कर सकता है अगर आप मांग करें.
5. कब नहीं करना चाहिए होम लोन बैलेंस ट्रांसफर
अगर आपने लोन का बड़ा हिस्सा चुका दिया है, दर का अंतर छोटा है, या नए बैंक की छिपी फीस ज्यादा है, तो ट्रांसफर सही नहीं होगा. प्रोसेसिंग फीस, वैल्यूएशन चार्ज और नए डॉक्यूमेंटेशन की लागत भी जोड़ें.
होम लोन बैलेंस ट्रांसफर सोच-समझ कर लेना चाहिए. सारे खर्च निकाल कर बचत देखें. अगर कुल ब्याज में असली कमी आती है और लंबी योजना में फिट बैठता है, तो ट्रांसफर फायदेमंद है. नहीं तो अपने बैंक से बात कर दर घटवाना आसान और सुरक्षित ऑप्शन है.
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