दिल्ली के कीर्ति नगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक महिला और उसकी सास ने अपने लॉकर से सोना गायब होने का आरोप लगाया. इस खबर के बीच एक सवाल जो कई लोगों के मन में है वो ये है कि बैंक लॉकर से अगर सामान या फिर सोना गायब हो जाए तो उसका जिम्मेदार कौन होगा और इसकी भरपाई कौन करेगा?आरबीआई के 2022 के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगर बैंक की गलती से नुकसान होता है जैसे आग लगना, चोरी, लूट या कर्मचारी की फ्रॉड, तो बैंक ग्राहक को सालाना लॉकर किराए की 100 गुना रकम तक मुआवजा दे सकता है. इसके अलावा क्या नियम है, ये भी आपको बताते हैं.
जांच में सामने आया कि शिकायत करने वाली महिलाओं का जॉइंट लॉकर था, जिसे 5 फरवरी को हाल ही में ऑपरेट किया गया था. पुलिस ने जांच की तो पता चला कि बड़े स्तर पर चोरी की खबर सिर्फ अफवाह थी. इस पूरी घटना के बीच एक सवाल जो सबके सामने आया है कि बैंक लॉकर में सोना या कीमती सामान अगर चोरी हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी होती है. आपको बता दें कि बैंक लॉकर सिर्फ एक स्टोरेज सर्विस है, मतलब बैंक जगह देता है लेकिन अंदर क्या रखा है उसकी जानकारी नहीं रखता और न ही उसकी सुरक्षा का पूरा बीमा करता है.
बैंक लॉकर से जुड़ा RBI का नियम
आरबीआई के नियमों से साफ है कि सामान्य चोरी या नुकसान में बैंक जिम्मेदार नहीं होता. बैंक तभी जिम्मेदार माना जाता है जब उसकी अपनी लापरवाही साबित हो जाए, जैसे सुरक्षा में बड़ी कमी, सीसीटीवी न चलना, स्टाफ की गलती या बैंक कर्मचारी द्वारा धोखाधड़ी. ऐसे मामलों में भी बैंक का मुआवजा बहुत सीमित होता है.
आरबीआई के 2022 के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगर बैंक की गलती से नुकसान होता है जैसे आग लगना, चोरी, लूट या कर्मचारी की फ्रॉड, तो बैंक ग्राहक को सालाना लॉकर किराए की 100 गुना रकम तक मुआवजा दे सकता है. मिसाल के तौर पर अगर आपका सालाना किराया 4000 रुपये है तो ज्यादा से ज्यादा 4 लाख रुपये मिल सकते हैं, चाहे अंदर लाखों-करोड़ों का सोना हो. अगर नुकसान प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप या बाढ़ से होता है तो बैंक बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं होता और कुछ नहीं मिलता. ये नियम 2025-2026 में भी लागू हैं और बैंक अपने एग्रीमेंट में यही लिखते हैं कि वे सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं हैं.
बैंक लॉकर में कीमती सामान या सोना रखने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
बैंक लॉकर एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ना चाहिए क्योंकि उसमें साफ लिखा होता है कि बैंक किन स्थितियों में कितना जिम्मेदार है. ग्राहक को लॉकर में क्या रखा है उसकी कोई लिस्ट बैंक को नहीं देनी होती, इसलिए बैंक कहता है कि हमें पता ही नहीं क्या था. अगर चोरी या कोई समस्या हो तो तुरंत पुलिस में शिकायत करें और बैंक को लिखित में सूचना दें. साथ ही लॉकर में रखी चीजों की फोटो, लिखित लिस्ट और रसीदें घर पर सुरक्षित रखें ताकि बाद में सबूत दे सकें.
कीमती सामान जैसे सोना, ज्वेलरी या महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए अलग से इंश्योरेंस करवाना सबसे अच्छा तरीका है. कई बैंक खुद ग्राहकों को सलाह देते हैं कि लॉकर में रखी चीजों का अपना बीमा कर लें क्योंकि बैंक का कवर बहुत कम है. अगर आपका लॉकर किराया कम है तो मुआवजा भी बहुत कम होगा, इसलिए हाई वैल्यू वाले सामान के लिए पर्सनल इंश्योरेंस जरूरी है. इससे चोरी या नुकसान होने पर पूरा मुआवजा मिल सकता है. बैंक लॉकर सुरक्षित तो है लेकिन पूरी तरह गारंटीड नहीं. बैंक सिर्फ जगह और बेसिक सुरक्षा देता है, लेकिन आपकी कीमती चीजों की पूरी जिम्मेदारी आपकी खुद की है.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.