भारत में घर खरीदने के लिए 100% होम लोन बिना डाउन पेमेंट के लेना संभव है या नहीं, इसके लिए आरबीआई का नियम है. RBI के नियमों के अनुसार, लोन टू वैल्यू (LTV) रेशियो तय करता है कि प्रॉपर्टी की कीमत के आधार पर अधिकतम कितनी राशि लोन के रूप में मिलेगी. 30 लाख तक की प्रॉपर्टी पर अधिकतम 90% लोन मिलता है, 30–75 लाख की प्रॉपर्टी पर 80%, और 75 लाख से ऊपर की प्रॉपर्टी पर 75% लोन मिलता है. इसका मतलब है कि हमेशा कुछ राशि खरीदार को अपनी जेब से निवेश करनी होगी, हालांकि डाउन पेमेंट को मैनेज करने के तरीके मौजूद हैं.
आरबीआई के नियम बताते हैं कि प्रॉपर्टी की कीमत के आधार पर लोन की लिमिट अलग-अलग होती है. अगर घर की कीमत 30 लाख रुपये तक है तो बैंक अधिकतम 90 प्रतिशत तक लोन दे सकते हैं यानी आपको कम से कम 10 प्रतिशत डाउन पेमेंट खुद देना पड़ता है. 30 लाख से 75 लाख रुपये तक की प्रॉपर्टी पर 80 प्रतिशत तक लोन मिल सकता है तो डाउन पेमेंट 20 प्रतिशत हो जाता है. और 75 लाख से ज्यादा की प्रॉपर्टी पर सिर्फ 75 प्रतिशत तक लोन मिलता है यानी 25 प्रतिशत डाउन पेमेंट जरूरी है. इसका मतलब है कि 100 प्रतिशत लोन कभी नहीं मिलता और खरीदार को हमेशा कुछ पैसा अपनी जेब से लगाना पड़ता है. फिर भी डाउन पेमेंट को मैनेजेबल यानी संभव बनाने के कई तरीके हैं.
को-एप्लिकेंट और सही क्रेडिट स्कोर है जरूरी
सबसे पहले अच्छी क्रेडिट स्कोर बनाएं क्योंकि 750 या उससे ऊपर स्कोर होने पर बैंक ज्यादा लोन देने को तैयार होते हैं और कभी-कभी ज्यादा एलटीवी ऑफर करते हैं. दूसरा तरीका है को-एप्लिकेंट या जॉइंट लोन लेना. अगर पति-पत्नी या परिवार के कोई सदस्य साथ में आवेदन करें जिनकी अच्छी इनकम और क्रेडिट स्कोर हो तो कुल लोन अमाउंट बढ़ सकता है और डाउन पेमेंट कम हो सकता है. तीसरा है पीएमएवाई यानी प्रधानमंत्री आवास योजना का फायदा उठाना. इस स्कीम में कुछ कैटेगरी जैसे ईडब्ल्यूएस या एलआईजी के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी मिलती है जो इंटरेस्ट सब्सिडी के रूप में काम करती है और प्रभावी रूप से डाउन पेमेंट का बोझ कम करती है हालांकि यह 100 प्रतिशत लोन नहीं देती.
10-20 प्रतिशत डाउन पेमेंट जरूरी
कई लोग सोचते हैं कि कोई जुगाड़ से 100 प्रतिशत फाइनेंस हो सकता है लेकिन वैध तरीके से नहीं. कुछ बैंक या एनबीएफसी स्पेशल ऑफर देते हैं जहां वे ज्यादा एलटीवी देते हैं लेकिन फिर भी 10-20 प्रतिशत डाउन पेमेंट तो रहता ही है. डाउन पेमेंट कम करने के लिए पहले से बचत करें. फिक्स्ड डिपॉजिट म्यूचुअल फंड या एसआईपी में पैसा लगाकर धीरे-धीरे जमा करें. अच्छी सैलरी वाली नौकरी या प्रमोशन से इनकम बढ़ाएं ताकि बैंक ज्यादा लोन अप्रूव करे. प्रॉपर्टी चुनते समय सस्ती जगह या रेडी टू मूव फ्लैट देखें जहां कीमत कम हो तो डाउन पेमेंट भी कम लगेगा.
डाउन पेमेंट ज्यादा करने के फायदे
डाउन पेमेंट ज्यादा करने के कई फायदे भी हैं. अगर आप ज्यादा पैसा डाउन देते हैं तो लोन अमाउंट कम होता है इंटरेस्ट कम लगता है और ईएमआई आसान हो जाती है. लेकिन अगर आपके पास पैसा कम है तो कम डाउन पेमेंट से शुरू करें और बाद में प्रीपेमेंट करके लोन जल्दी खत्म करें. आजकल होम लोन की ब्याज दरें 8.5 से 9.5 प्रतिशत के बीच हैं और कई बैंक प्रोसेसिंग फीस माफ या कम करते हैं.
कुल मिलाकर घर खरीदने के लिए प्लानिंग जरूरी है. आरबीआई के नियमों का पालन करते हुए डाउन पेमेंट को मैनेजेबल बनाएं. अच्छा क्रेडिट स्कोर को-एप्लिकेंट अच्छी स्कीम और बचत से आप अपने सपनों का घर आसानी से खरीद सकते हैं. अगर आप दिल्ली जैसे शहर में हैं तो लोकल बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से बात करें क्योंकि वहां प्रॉपर्टी महंगी है लेकिन लोन ऑप्शन अच्छे हैं. आने वाले समय में अगर ब्याज दरें और कम हुईं तो घर खरीदना और आसान हो जाएगा. लेकिन याद रखें 100 प्रतिशत लोन नहीं मिलता इसलिए थोड़ा पैसा तैयार रखें और स्मार्ट तरीके से प्लान करें.
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