इसलिए, चेक काटने से पहले इन 3 शब्दों के बीच का अंतर समझना जरूरी है
1. कारपेट एरिया
आसान भाषा में कहें तो, कारपेट एरिया वह वास्तविक क्षेत्र है जहां आप कालीन बिछा सकते हैं. यह घर की दीवारों के अंदर की नेट यूजेबल स्पेस होती है. इसमें लिविंग रूम, बेडरूम, किचन और बाथरूम का फर्श शामिल होता है.
- क्या शामिल नहीं है: इसमें दीवारों की मोटाई, छज्जे या छत शामिल नहीं होती.
- महत्व: रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) के नियमों के अनुसार, अब बिल्डर्स के लिए कारपेट एरिया बताना जरूरी है. आपको इसी एरिया के आधार पर कीमत का आकलन करना चाहिए.
2. बिल्ट-अप एरिया
जब कारपेट एरिया में दीवारों की मोटाई और बालकनी के एरिया को भी जोड़ दिया जाता है, तो उसे बिल्ट-अप एरिया कहते हैं. इसमें यूटिलिटी एरिया और डक्ट्स भी शामिल हो सकते हैं.
- गणना: आमतौर पर यह कारपेट एरिया से 10 फीसदी से 15 फीसदी तक ज्यादा होता है.
- सावधानी: अगर बिल्डर आपको बिल्ट-अप एरिया बताकर घर बेच रहा है, तो समझ लीजिए कि आपके चलने-फिरने की जगह उससे काफी कम होगी.
3. सुपर बिल्ट-अप एरिया
यही वह जादुई आंकड़ा है जिसे बिल्डर्स सबसे ज्यादा प्रमोट करते हैं. इसमें बिल्ट-अप एरिया के साथ-साथ बिल्डिंग की कॉमन एरिया का हिस्सा भी जोड़ दिया जाता है.
क्या शामिल है: लिफ्ट, सीढ़ियां, लॉबी, क्लब हाउस, स्विमिंग पूल और जिम.
गणित: यह कारपेट एरिया से 25 फीसदी से 40 फीसदी तक ज्यादा हो सकता है. इसे ‘लोडेबिलिटी’ भी कहा जाता है.
घर खरीदते समय क्या ध्यान रखें?
ज्यादातर लोग “सुपर बिल्ट-अप एरिया” की कीमत देखकर प्रभावित हो जाते हैं, लेकिन असल में आपको इस्तेमाल के लिए सिर्फ कारपेट एरिया मिलता है. हमेशा बिल्डर से लिखित में ‘कारपेट एरिया’ मांगें और प्रति स्क्वायर फीट रेट की गणना उसी के आधार पर करें. इससे आप छिपी हुई लागतों से बच सकेंगे और सही डील कर पाएंगे.
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