मार्केट रेगुलेटर सेबी अब सोना और चांदी ईटीएफ में होने वाली अचानक और भारी बढ़त को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का प्रस्ताव रखाव है. अब सोने-चांदी के ईटीएफ की कीमतों में होने वाली ‘मनमानी’ हलचल पर लगाम लग सकेगी.
अक्सर देखा गया है कि बाजार में सोने या चांदी की असली कीमत कुछ और होती है, लेकिन शेयर बाजार पर लिस्टेड उनसे जुड़े ईटीएफ की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं. साल 2025 में ऐसे मामले सामने आए जहां ईटीएफ की कीमत एक ही दिन में 21.26 फीसदी तक उछल गई. इससे निवेशकों को नुकसान होने का डर रहता है क्योंकि वे ‘असली कीमत’ से बहुत ज्यादा दाम पर यूनिट्स खरीद लेते हैं.
SEBI का 2 नए प्रस्ताव
1. नया प्राइस बैंड
अब ट्रेडिंग की शुरुआत में ±6% का एक शुरुआती प्राइस बैंड होगा. अगर कीमत इस लिमिट को छूती है, तो 15 मिनट का ‘कूलिंग-ऑफ’ पीरियड (ब्रेक) दिया जाएगा. इसके बाद इसे 3-3% करके बढ़ाया जा सकता है, लेकिन पूरे दिन में यह ±20% से ज्यादा नहीं हिल पाएगा.
2. बेस प्राइस में सुधार:
अभी तक ईटीएफ की शुरुआती कीमत तय करने का तरीका थोड़ा पुराना था. अब सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि पिछले दिन की औसत ट्रेडिंग कीमत या एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) को आधार बनाया जाए, ताकि सुबह बाजार खुलते ही कीमतें असलियत के करीब हों.
निवेशकों को क्या फायदा होगा?
अक्सर सप्लाई कम होने या भारी डिमांड की वजह से ईटीएफ की कीमतें ‘प्रीमियम’ पर ट्रेड करने लगती हैं. नए नियमों से यह सुनिश्चित होगा कि ईटीेफ की कीमत उसके पीछे रखे गए असली सोने या चांदी की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के तालमेल में रहे. इससे शॉर्ट-टर्म निवेशकों को होने वाले घाटे का रिस्क कम होगा.
ETF की खास बातें:
ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड) ऐसे फंड हैं जो एक्सचेंज पर ट्रेड करते हैं. यह किसी इंडेक्स (जैसे निफ्टी, सेंसेक्स), गोल्ड-सिल्वर या सेक्टर को ट्रैक करता है, जिससे निवेशकों को कम लागत में डायवर्सिटी और हाई लिक्विडिटी मिलती है.
- शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होता है.
- एक ही ईटीएफ में कई शेयर या कमोडिटी शामिल हो सकती है.
- कम लागत में विविध निवेश
- बाजार खुला रहने तक कभी भी खरीद-बिक्री.
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