सिर्फ 5,000 रुपये की मासिक SIP से करोड़ों का सपना सच हो सकता है. एक निवेशक ने अनुशासन और धैर्य से 1 करोड़ का आंकड़ा छू लिया. बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद उसने SIP कभी नहीं रोकी. उसकी कहानी बताती है कि निरंतरता ही असली जीत दिलाती है.
बाजार गिरा, पोर्टफोलियो रुका, फिर भी SIP नहीं रोकी- मिला करोड़ क्लब. (Image:AI)
छोटी शुरुआत, बड़ा लक्ष्य
निवेशक ने 2018 में 5,000 रुपये की SIP शुरू की थी. उस समय आय सीमित थी और बाजार को लेकर भरोसा भी कम था. कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में जब बाजार तेजी से गिरा, तब भी वह SIP बढ़ाने को लेकर हिचकिचा रहा था. उस समय उसकी मासिक SIP 10,000 से 15,000 रुपये के बीच थी. लेकिन धीरे-धीरे उसने बाजार के उतार-चढ़ाव को समझा और सबसे अहम सबक सीखा- SIP कभी बंद नहीं करनी चाहिए.
बाजार गिरा, लेकिन धैर्य नहीं टूटा
नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच उसका पोर्टफोलियो करीब 95 लाख रुपये पर अटका रहा, जबकि वह लगातार निवेश करता रहा. उसने मजाक में इस ठहराव के लिए ‘Thanks to Trump!’ कहा, लेकिन असल में यह बाजार की सामान्य अस्थिरता थी. इस दौर ने उसे सिखाया कि खबरों पर प्रतिक्रिया देने से बेहतर है अपनी निवेश योजना पर टिके रहना.
म्यूचुअल फंड क्यों चुना?
निवेशक ने बताया कि उसने सीधे शेयरों में निवेश करना बंद कर दिया, क्योंकि वह म्यूचुअल फंड के रिटर्न से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था. उसका मानना है कि अगर कोई व्यक्ति खुद शेयर चुनकर बेहतर रिटर्न दे सकता है तो वह रास्ता ठीक है, लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए म्यूचुअल फंड ज्यादा सरल और प्रभावी विकल्प है. इससे समय की बचत होती है और पेशेवर प्रबंधन का फायदा मिलता है.
असली मंत्र: आय बढ़ाओ, योजना पर टिके रहो
इस निवेशक का सबसे बड़ा संदेश है- अपनी सक्रिय आय बढ़ाने पर ध्यान दें और स्पष्ट वित्तीय लक्ष्य बनाएं. साथ ही सही एसेट एलोकेशन रखें, यानी निवेश को शेयर, डेट और अन्य विकल्पों में संतुलित तरीके से बांटें. उसका कहना है कि कुछ साल बाद पीछे मुड़कर देखेंगे तो हैरान रह जाएंगे कि आप कितनी दूर आ चुके हैं. यह कहानी बताती है कि बड़ी सफलता अचानक नहीं मिलती, बल्कि छोटे और लगातार कदमों से बनती है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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