यह इंश्योरेंस कैसे काम करता है, बहुत आसान है. आप सालाना या मासिक प्रीमियम देते हैं, जो कुछ रुपये प्रतिदिन से शुरू होता है, मतलब बहुत सस्ता पड़ता है. अगर कोई साइबर हमला होता है जैसे यूपीआई फ्रॉड, अनधिकृत ट्रांजेक्शन या पहचान चोरी, तो आप कंपनी को तुरंत सूचना देते हैं. कंपनी नुकसान का आकलन करती है और अगर पॉलिसी में कवर है तो भरपाई कर देती है. कई कंपनियां परिवार की पूरी पॉलिसी भी देती हैं, ताकि घर के सभी सदस्य सुरक्षित रहें क्योंकि आजकल बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सब ऑनलाइन हैं. इसमें फंड्स की चोरी, पहचान चोरी, मालवेयर रिमूवल जैसी चीजें कवर होती हैं.
क्या-क्या साइबर इंश्योरेंस में होता है कवर?
क्या-क्या कवर होता है, देखिए. अनधिकृत ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, जैसे कोई फेक लिंक पर क्लिक करके पैसा चला जाए. पहचान चोरी, जहां आपकी डिटेल्स चुराकर कोई और इस्तेमाल करे. फिशिंग अटैक, जहां फेक ईमेल या मैसेज से OTP या पासवर्ड मांगते हैं. रैनसमवेयर, जहां फाइल्स लॉक करके पैसे मांगते हैं. कुछ पॉलिसियों में साइबर हैरेसमेंट या स्टॉकिंग भी कवर होता है. साथ में कानूनी सलाह, हैक अकाउंट रिस्टोर करने में मदद और बैंक-पुलिस में कंप्लेंट फाइल करने का सपोर्ट मिलता है. यह सब मिलाकर आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहती है.
कौन-कौन इस इंश्योरेंस को ले सकता है?
कौन-कौन ले सकता है. ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले, बैंकिंग यूज करने वाले, हाई नेटवर्थ वाले लोग, रिमोट वर्कर्स, फ्रीलांसर, सोशल मीडिया यूजर्स, इन्फ्लुएंसर्स, बच्चे और परिवार वाले सबके लिए जरूरी है. खासकर अब जब डिजिटल ट्रांजेक्शन इतने ज्यादा हैं, एक गलती महंगी पड़ सकती है. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञ रुशिक पटेल कहते हैं कि भारतीय परिवारों के लिए साइबर इंश्योरेंस डिजिटल जोखिमों से मजबूत सुरक्षा है. यह ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग और रैनसमवेयर से नुकसान कवर करता है.
कई कंपनियां कानूनी मदद और हैक अकाउंट ठीक करने में सहायता करती हैं. लेकिन ध्यान रखें, अगर लापरवाही हुई हो जैसे OTP खुद शेयर कर दिया, देर से रिपोर्ट किया या क्रिप्टो जैसे अनियमित प्लेटफॉर्म पर नुकसान हुआ तो दावा खारिज हो सकता है. इसलिए पॉलिसी की शर्तें ध्यान से पढ़ना जरूरी होता है. 2026 में बाजार तेजी से बढ़ रहा है और मार्केट साइज 2025 में 752 मिलियन डॉलर था और 2034 तक बहुत बड़ा होने वाला है ऐसे में बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां मिलकर डिजिटल अरेस्ट स्कैम जैसी नई ठगियों के लिए भी पॉलिसी बनाने पर विचार कर रही हैं. RBI भी यूपीआई फ्रॉड में कुछ रिलीफ दे रहा है लेकिन इंश्योरेंस से ज्यादा मजबूत सुरक्षा मिलती है.
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