क्या है 2-6-10 का नियम?
यह नियम कहता है कि
- किसी चीज की कीमत आपकी मासिक सैलरी के 50% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
- लोन की अवधि 6 महीने से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
- ईएमआई आमदनी के 10% से कम रहनी चाहिए.
यह नियम छोटे-मोटे खर्च या कंज्यूमर खरीदारी के लिए बनाया गया था ताकि लोग जरूरत से ज्यादा कर्ज न लें और जल्दी चुका दें.
आज के समय में क्यों कमजोर पड़ रहा है यह नियम?
आज की हकीकत पहले से काफी अलग है. लोगों के पास होम लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे कई कर्ज होते हैं. खर्च लगातार बढ़ रहे हैं. कई लोगों की आय फिक्स नहीं बल्कि वैरिएबल होती है. ऐसे में सिर्फ एक फॉर्मूला हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को सही तरह से नहीं दिखाता.
सैलरी नहीं, बची हुई रकम से तय करें ईएमआई
एक्सपर्ट का कहना है कि ईएमआई तय करते समय सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि महीने के अंत में बचने वाली रकम देखनी चाहिए. मान लीजिए दो लोगों की सैलरी 1 लाख रुपये है. पहले आदमी का खर्च 35,000 रुपये है. दूसरे का खर्च 70,000 रुपये है. अगर दोनों 30,000 रुपये ईएमआई भरते हैं, तो पहले आदमी के पास पैसा बच जाएगा, जबकि दूसरे के लिए यह भारी पड़ सकता है.
ईएमआई का सही दायरा क्या होना चाहिए?
- कुल ईएमआई नेट इनकम के 30-35% के भीतर रहे.
- कम से कम 6 महीने का इमरजेंसी फंड जरूर हो.
- ईएमआई देने के बाद भी 15-20% बचत जारी रहनी चाहिए.
- अगर ईएमआई इतनी ज्यादा हो जाए कि बचत बंद हो जाए, तो समझिए कर्ज का बोझ ज्यादा है.
लोन लेने से पहले 3 टेस्ट जरूर करें
- 6 महीने का सर्वाइवल टेस्ट- क्या आपके पास इतने पैसे हैं कि 6 महीने तक ईएमआई और जरूरी खर्च चला सकें?
- ब्याज दर झटका टेस्ट- ईएमआई में 1-2% ब्याज बढ़ाकर देखें. अगर बजट बिगड़ जाता है तो लोन भारी पड़ सकता है.
- इनकम रियलिटी टेस्ट- बोनस या इंसेंटिव के भरोसे ईएमआई तय न करें. ईएमआई हमेशा फिक्स आय से ही प्लान करें.
सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
बहुत से लोग बैंक से लोन मंजूर होते ही उसे अफोर्डेबल मान लेते हैं. लेकिन सच यह है कि लोन की मंजूरी और उसे आराम से चुकाना दो अलग बातें हैं.
ईएमआई चुकाते हुए बचत करना और चैन की नींद जरूरी
2-6-10 नियम पूरी तरह बेकार नहीं है, लेकिन आज के समय में सिर्फ इसी फॉर्मूले पर भरोसा करना सही नहीं है. जो ईएमआई बैंक आपको मंजूरी देता है, वह जरूरी नहीं कि आपकी जेब के लिए सही हो. सही ईएमआई वही है जिसे चुकाते हुए आप अपनी बचत भी कर सकें और चैन की नींद सो सकें.
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