एक्सपर्ट की सलाह क्या कहती है?
हेल्थ इंश्योरेंस में वैकल्पिक इलाज का कवर इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी पॉलिसी में AYUSH बेनिफिट शामिल है या नहीं और उसमें OPD को कैसे परिभाषित किया गया है. इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के नियमों के मुताबिक, सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में AYUSH इलाज जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी का कवर देना जरूरी है. लेकिन यह कवर आमतौर पर सिर्फ अस्पताल में भर्ती (इन-पेशेंट) इलाज तक सीमित होता है और वह भी सरकार से मान्यता प्राप्त या एक्रेडिटेड AYUSH अस्पतालों में.
OPD इलाज में कहां अटकता है मामला?
आयुर्वेद, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी या एक्यूपंक्चर की OPD कंसल्टेशन आमतौर पर कवर नहीं होती. ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां अब भी हॉस्पिटलाइजेशन खर्च पर ही फोकस करती हैं. एक्यूपंक्चर या नेचुरोपैथी तभी कवर हो सकती है, जब वह मान्य AYUSH इलाज का हिस्सा हो और मरीज को अस्पताल में भर्ती होना पड़े.
यहां तक कि जहां AYUSH हॉस्पिटलाइजेशन कवर मिलता है, वहां भी:
- खर्च की सीमा तय होती है.
- इलाज का प्रकार, मेडिकल जरूरत और अस्पताल की एलिजिबिलिटी अहम होती है.
क्या कोई अपवाद भी है?
फिलहाल इंडस्ट्री में AYUSH के ओपीडी कवर बहुत सीमित हैं. हालांकि कुछ कंपनियां इससे अलग रास्ता अपना रही हैं. उदाहरण के तौर पर, आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस ने Health Meter+ के जरिए चुनिंदा AYUSH इलाज के लिए ओपीडी कवर देना शुरू किया है, जो प्रिवेंटिव और होलिस्टिक हेल्थ पर फोकस करता है.
आमतौर पर AYUSH इलाज का कवर अस्पताल में भर्ती होने पर
इंश्योरेंस रेगुलेटर इरडा के नियमों के तहत AYUSH इलाज का कवर अस्पताल में भर्ती होने पर मिलता है, लेकिन OPD के जरिए वैकल्पिक इलाज का खर्च आमतौर पर इंश्योरेंस में शामिल नहीं होता, जब तक पॉलिसी में इसे साफ-साफ न जोड़ा गया हो. अगर आप रेगुलर रूप से वैकल्पिक चिकित्सा का सहारा लेते हैं, तो पॉलिसी खरीदने या रिन्यू कराने से पहले उसकी शर्तें जरूर पढ़ें.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.