यूनियन बजट 2024 में सरकार ने लिस्टेड इक्विटी और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया था. राहत बस इतनी मिली कि टैक्स-फ्री छूट की सीमा 1 लाख से बढ़कर 1.25 लाख रुपये हो गई. अब निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि बजट 2026 में फिर से टैक्स दर 10 प्रतिशत कर दी जाए और छूट को 2 लाख रुपये तक बढ़ाया जाए. अलग-अलग रिपोर्ट्स में कई एक्सपर्ट इसकी मांग कर चुके हैं. अगर ऐसा हुआ, तो आम निवेशक की असली कमाई सीधे बढ़ जाएगी.
बता दें कि कई मीडिया रिपोर्ट्स और X (ट्विटर) पर यूजर्स ने बजट 2026 में LTCG टैक्स को 10% तक घटाने और छूट की लिमिट को 2 लाख रुपये तक बढ़ाने की मांग की है. यह मांग मुख्य रूप से रिटेल निवेशकों, मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज फर्म्स से आ रही है, क्योंकि 2024 में टैक्स बढ़ने से पोस्ट-टैक्स रिटर्न्स प्रभावित हुए हैं.
आज की स्थिति यह है कि अगर किसी निवेशक का सालाना लॉन्ग टर्म गेन 1.25 लाख रुपये से ज्यादा है, तभी उस पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है और इंडेक्सेशन का कोई फायदा नहीं मिलता. यानी महंगाई का असर जोड़कर टैक्स घटाने का विकल्प खत्म हो चुका है. यही वजह है कि रिटेल निवेशक टैक्स बोझ को लेकर थोड़ा असहज महसूस कर रहे हैं. प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर ₹2 लाख तक का मुनाफा पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा और उससे ऊपर की रकम पर केवल 10 प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा.
कितनी कमाई पर कितनी बचत? समझिए गणित
मान लीजिए कोई छोटा निवेशक साल भर में ₹1.5 लाख का लॉन्ग टर्म गेन कमाता है. मौजूदा नियमों में ₹1.25 लाख की छूट के बाद ₹25,000 टैक्स के दायरे में आता है और उस पर 12.5 प्रतिशत टैक्स यानी ₹3,125 देना पड़ता है. ऐसे में उसके हाथ में करीब ₹1,46,875 बचते हैं. अगर नई व्यवस्था लागू हो जाए, तो ₹1.5 लाख पूरी तरह छूट के अंदर आ जाएगा और टैक्स शून्य होगा. मतलब सीधी बचत ₹3,125 की होगी.
अब मीडियोकर निवेशक का उदाहरण लें, जिसकी सालाना लॉन्ग टर्म कमाई 3 लाख रुपये है. अभी उसे ₹1.25 लाख की छूट मिलती है और बाकी ₹1.75 लाख पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है, जो लगभग ₹21,875 बनता है. टैक्स कटने के बाद उसके पास करीब ₹2,78,125 बचते हैं. नई नीति में ₹2 लाख तक की छूट मिलने के बाद सिर्फ ₹1 लाख टैक्सेबल रहेगा और उस पर 10 प्रतिशत टैक्स यानी ₹10,000 देना होगा. ऐसे में उसकी जेब में ₹2,90,000 आएंगे. यानी सीधे ₹11,875 का अतिरिक्त फायदा.
बड़े निवेशक के मामले में अगर किसी ने ₹10 लाख का लॉन्ग टर्म गेन कमाया है, तो अभी ₹1.25 लाख की छूट के बाद ₹8.75 लाख पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है, जो लगभग ₹1,09,375 होता है. टैक्स कटने के बाद हाथ में ₹8,90,625 बचते हैं. प्रस्तावित नियमों में ₹2 लाख की छूट के बाद ₹8 लाख पर 10 प्रतिशत टैक्स लगेगा, यानी ₹80,000. इस तरह निवेशक के पास ₹9,20,000 रहेंगे. मतलब लगभग ₹29,375 की सीधी बचत.
दो हिस्सों में होता है फायदा
पूरा फायदा दो हिस्सों में समझा जा सकता है. पहला, छूट बढ़ने से ₹75,000 की अतिरिक्त रकम टैक्स-फ्री हो जाती है, जिस पर पहले 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता था. इससे लगभग ₹9,375 की बचत अपने आप हो जाती है. दूसरा, टैक्स रेट 12.5 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत होने से बाकी बची रकम पर भी कम टैक्स देना पड़ता है. जितना ज्यादा गेन, उतनी ज्यादा बचत.
अगर किसी निवेशक का कुल लॉन्ग टर्म गेन ₹2 लाख से कम है, तो उसका पूरा मुनाफा टैक्स-फ्री हो सकता है. जिनका गेन इससे ज्यादा है, उन्हें छूट और कम टैक्स रेट दोनों का फायदा मिलेगा. इससे पोस्ट-टैक्स रिटर्न बेहतर होंगे और लोग लंबे समय के लिए शेयर बाजार और इक्विटी फंड में निवेश करने के लिए ज्यादा उत्साहित होंगे.
हालांकि, यह सब अभी अनुमान और उम्मीद पर आधारित है. असली तस्वीर बजट 2026 में ही साफ होगी. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अधिक आय वाले निवेशकों पर सरचार्ज और सेस अलग से लग सकता है. इसलिए निवेश से पहले टैक्स सलाहकार से सलाह लेना समझदारी होगी. फिर भी अगर सरकार यह राहत देती है, तो आम निवेशक के लिए यह एक बड़ा सकारात्मक कदम साबित हो सकता है.
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