50 साल के बाद हॉस्पिटलाइजेशन और इलाज की लागत बहुत बढ़ जाती है, मेडिकल इन्फ्लेशन की वजह से भी प्रीमियम ऊंचा होता है. कई लोग उम्मीद छोड़ देते हैं लेकिन इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि 5 अच्छे तरीके हैं जिनसे सीनियर सिटीजन को ज्यादा कवरेज मिल सकता है और प्रीमियम भी कंट्रोल में रहता है. ये तरीके आसान हैं और कई परिवार इस्तेमाल कर रहे हैं.
कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस
ईटी कि रिपोर्ट के अनुसार, पहला तरीका है कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस के साथ पर्सनल पॉलिसी मिलाना. अगर आप सैलरीड हो तो कंपनी की पॉलिसी में माता-पिता को डिपेंडेंट के तौर पर ऐड कर सकते हो, इसमें वेटिंग पीरियड नहीं होता और क्लेम आसान होता है. लेकिन ये कवरेज ज्यादातर 3 से 5 लाख तक ही होता है, जो बड़े शहरों में सीरियस इलाज के लिए कम पड़ जाता है. इसलिए अलग से पर्सनल हेल्थ पॉलिसी लें जो जॉब चेंज होने पर भी कंटिन्यू रहे. प्रीमियम उम्र, कवरेज अमाउंट और हेल्थ पर निर्भर करता है.
उदाहरण के लिए HDFC ERGO के अनुसार 50 साल की उम्र में 10 लाख कवरेज का सालाना प्रीमियम करीब 23 हजार रुपये, 60 साल में 37 हजार, 70 साल में 68 हजार और 80 साल में 99 हजार तक हो सकता है. 50 लाख कवरेज के लिए 50 साल में 39 हजार से शुरू होकर 80 साल में 1.5 लाख तक जाता है. स्टार हेल्थ जैसी कंपनियों में 10 लाख कवरेज के लिए सीनियर सिटीजन का प्रीमियम 25 हजार के आसपास और फैमिली फ्लोटर में दो सीनियर के लिए 40 हजार तक हो सकता है.
बेस पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप प्लान
पहले कॉर्पोरेट या अलग से 5-10 लाख की बेस पॉलिसी लें, फिर सुपर टॉप-अप ऐड करें. इसमें डिडक्टिबल अमाउंट बेस पॉलिसी से कवर हो जाता है, उसके बाद टॉप-अप बाकी खर्च उठाता है. इससे कुल कवरेज बहुत ज्यादा हो जाता है लेकिन प्रीमियम कम रहता है. कई परिवार 10 लाख बेस के साथ टॉप-अप लेकर हाई कवरेज लेते हैं. अच्छे हॉस्पिटल नेटवर्क, कम रूम रेंट रेस्ट्रिक्शन और प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज कवर वाली पॉलिसी चुनें ताकि पॉकेट से कम खर्च हो.
को-पेमेंट वाली पॉलिसी चुनना
इसमें क्लेम का एक फिक्स्ड प्रतिशत आप खुद देते हो, जैसे 20 फीसदी, और बाकी कंपनी देती है. इससे कंपनी का रिस्क कम होता है और प्रीमियम काफी सस्ता हो जाता है. सीनियर सिटीजन के लिए ये अफोर्डेबल बनाता है लेकिन बड़े क्लेम में आपको भी कुछ पे करना पड़ता है, जैसे 12 लाख के बिल में 2.4 लाख खुद दें. इसलिए टर्म्स अच्छे से चेक करें.
डिडक्टिबल ऑप्शन
चौथा तरीका है डिडक्टिबल ऑप्शन वाली पॉलिसी. इसमें साल में पहले फिक्स्ड अमाउंट जैसे 50 हजार या 1 लाख खुद पे करना होता है, उसके बाद कंपनी पूरा कवर करती है. 10-15 लाख की पॉलिसी में छोटे खर्च खुद हैंडल कर लें तो प्रीमियम बहुत कम हो जाता है. अगर आपके पास थोड़े पैसे हैं तो ये अच्छा तरीका है.
आयुष्मान वाय वंदना
पांचवां और बहुत जरूरी 70 साल से ऊपर वालों के लिए आयुष्मान वाय वंदना है. ये फ्री में 5 लाख सालाना कवर देता है, इनकम कोई भी हो, कोई वेटिंग पीरियड नहीं. इंपैनल्ड हॉस्पिटल में इमरजेंसी या प्लान्ड ट्रीटमेंट के लिए सेफ्टी नेट है. इसे बेसिक कवर के तौर पर लें और प्राइवेट पॉलिसी से सपोर्ट करें.
ये सभी ऑप्शन से माता-पिता को अच्छा कवरेज मिल सकता है बिना ज्यादा बोझ के. प्रीमियम उम्र और हेल्थ पर बढ़ता है लेकिन स्मार्ट तरीके से चुनें तो उम्मीद बनी रहती है. जल्दी प्लान करें और अच्छी कंपनी चुनें.
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