अच्छी बात यह है कि बैंक आमतौर पर लोन की टेन्योर बढ़ाने या घटाने की अनुमति देते हैं, खासकर फ्लोटिंग रेट होम लोन में. लेकिन यह फैसला समझदारी से लेना जरूरी है, क्योंकि इससे आपकी कुल ब्याज लागत और EMI दोनों पर असर पड़ता है.
कैसे बदलती है होम लोन की टेन्योर
जब आप बैंक से टेन्योर बदलने की मांग करते हैं, तो बैंक आपके बाकी बचे लोन (Outstanding Principal) के आधार पर नया रीपेमेंट शेड्यूल बनाता है. इसमें दो तरीके हो सकते हैं-
- ईएमआई वही रहती है, लेकिन लोन की टेन्योर बदल जाती है.
- या अवधि वही रहती है और EMI बढ़ या घट जाती है.
शुरुआत के सालों में ज्यादा जाता है ब्याज
आमतौर पर 20 साल के लोन में पहले 7-10 साल तक EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है और मूलधन कम होता है. इसलिए अगर आप शुरुआती सालों में टेन्योर बदलते हैं तो उसका असर ज्यादा पड़ता है. बाद के सालों में इसका फायदा कम हो जाता है.
टेन्योर घटाने का फायदा
अगर आपकी आय बढ़ गई है या कोई दूसरा कर्ज खत्म हो गया है, तो लोन की टेन्योर कम करना फायदेमंद हो सकता है. ईएमआई में 10-15% की बढ़ोतरी करने से कई साल का समय कम हो सकता है. इससे कुल ब्याज में लाखों रुपये की बचत हो सकती है. उदाहरण के लिए, अगर किसी के पास 60 लाख रुपये का बकाया लोन 8.5% ब्याज पर 18 साल के लिए बचा है, तो टेन्योर 3-5 साल कम करने से काफी ब्याज बचाया जा सकता है.
टेन्योर बढ़ाने से क्या होगा
अगर EMI ज्यादा भारी लग रही है, तो लोन की टेन्योर बढ़ाकर ईएमआई कम की जा सकती है. इससे कुछ समय के लिए राहत मिलती है, लेकिन कुल ब्याज का खर्च बढ़ जाता है. यह फैसला तब ठीक है जब आपकी इनकम में अस्थायी दबाव हो, जैसे नौकरी बदलना, बिजनेस में मंदी या स्वास्थ्य खर्च. लेकिन सिर्फ लाइफस्टाइल खर्च के लिए अवधि बढ़ाना महंगा साबित हो सकता है.
ब्याज दर बदलने से भी बदल सकती है टेन्योर
फ्लोटिंग रेट होम लोन में जब ब्याज दर बढ़ती है तो कई बैंक ईएमआई बढ़ाने के बजाय लोन की टेन्योर बढ़ा देते हैं. ऐसे में आपका 20 साल का लोन चुपचाप 24 साल तक भी पहुंच सकता है. इसलिए समय-समय पर अमोर्टाइजेशन शेड्यूल जरूर चेक करना चाहिए.
प्रीपेमेंट और टेन्योर घटाना बेहतर तरीका
अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा है, तो पार्ट प्रीपेमेंट के साथ अवधि कम करना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है. इससे मूलधन सीधे कम होता है और ब्याज का बोझ भी घटता है.
सोच-समझकर लें फैसला
होम लोन की टेन्योर बीच में बदलना संभव है, लेकिन यह फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए. अगर लक्ष्य जल्दी कर्ज मुक्त होना है तो अवधि घटाना बेहतर है. अगर फिलहाल EMI का दबाव ज्यादा है तो टेन्योर बढ़ाना अस्थायी राहत दे सकता है. होम लोन सिर्फ EMI भरने का मामला नहीं, बल्कि लंबे समय की कैश-फ्लो प्लानिंग का हिस्सा होता है.
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