पर्सनल फाइनेंस के एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मोबाइल, फ्रिज, टीवी जैसे कंज्यूमर लोन लेते समय भावनाओं में बहने के बजाय गणित का सहारा लेना चाहिए. ऐसा न करने पर आप कर्ज के जाल में फंस सकते हैं.
किस्तें चुकाने के बाद आपके हाथ में कम से कम 70% सैलरी बचनी चाहिए.
पर्सनल फाइनेंस के एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कंज्यूमर लोन (मोबाइल, फ्रिज, टीवी आदि के लिए कर्ज) लेते समय भावनाओं में बहने के बजाय गणित का सहारा लेना चाहिए. ‘2-6-10’ का नियम आपके बजट को संतुलित रखने के लिए बनाया गया है. इस नियम का आप पालन करेंगे तो न तो आपके सिर कर्ज का बोझ चढ़ेगा और न ही इसे उतारने में आपको ज्यादा जोर आएगा.
क्या है ‘2-6-10’ नियम?
आइये इस नियम को जरा खुलकर समझते हैं-
- ‘2’ का नियम: आप जो गैजेट (जैसे मोबाइल) खरीद रहे हैं, उसकी मासिक ईएमआई आपकी कुल इन-हैंड सैलरी के 2% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
- ‘6’ का नियम: किसी भी गैजेट या लाइफस्टाइल उत्पाद के लिए लिया गया लोन 6 महीने के भीतर पूरी तरह खत्म हो जाना चाहिए. इससे लंबा कर्ज आपके भविष्य की योजनाओं को प्रभावित करता है.
- ‘10’ का नियम: आपके पास जितने भी कंज्यूमर लोन चल रहे हैं, उन सबकी कुल ईएमआई आपकी मासिक आय के 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए.
₹50,000 की सैलरी और ₹31,000 का स्मार्टफोन
मान लीजिए आपकी मासिक सैलरी ₹50,000 है. अब अगर आप ₹31,000 का स्मार्टफोन ईएमआई पर लेने की सोच रहे हैं, तो जरा गणित लगाइए. ‘2’ के नियम के हिसाब से आपकी ईएमआई ₹1,000 (सैलरी का 2%) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. लेकिन अगर आप इसे 6 महीने की किस्त पर लेते हैं, तो ईएमआई लगभग ₹5,100 आएगी. इसलिए आदर्श स्थिति तो यही है कि आप उतने रुपये का फोन लें, जिसकी ईएमआई 1000 रुपये से ज्यादा न बनें.
यह आपकी सैलरी का 10% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ एक फोन पर खर्च कर रहा है. इसका सीधा मतलब है कि आप अपनी वित्तीय सीमा से बाहर जाकर खर्च कर रहे हैं, जो भविष्य में आपकी एसआईपी (SIP), बीमा प्रीमियम और आपातकालीन बचत (Emergency Fund) में कटौती करने पर मजबूर कर देगा.
नो-कॉस्ट ईएमआई का मायाजाल
कंपनियां अक्सर नो-कॉस्ट ईएमआई के नाम पर आपको वह सामान भी बेच देती हैं जिसकी आपको जरूरत नहीं होती. फाइनेंशियल प्लानर्स के मुताबिक, एक स्वस्थ वित्तीय जीवन के लिए आपकी सभी ईएमआई (होम लोन, कार लोन मिलाकर) नेट इनकम के 30-35% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
किस्तें चुकाने के बाद आपके हाथ में कम से कम 70% सैलरी बचनी चाहिए, ताकि आप अपने रोजमर्रा के खर्चे पूरे कर सकें. इसके बावजूद, आपको अपनी कमाई का 15-20% हिस्सा भविष्य के लिए निवेश जरूर करना चाहिए. याद रखें, एक महंगा मोबाइल 2 साल में पुराना हो जाएगा, लेकिन आपकी बचत समय के साथ बढ़ती रहेगी. इसलिए, अगली बार फोन खरीदने से पहले ‘2-6-10’ नियम को जरूर याद रखें.
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