10 साल की नौकरी है गोल्डेन रूल
Employees’ Provident Fund Organisation के नियमों के मुताबिक कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 12 फीसदी हिस्सा पीएफ में जाता है. नियोक्ता भी 12 फीसदी योगदान करता है, जिसमें से 8.33 फीसदी हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता है. पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 साल की नौकरी जरूरी है. अगर आपने 10 साल की निरंतर सेवा पूरी की है, तो 58 साल की उम्र के बाद मासिक पेंशन पाने के हकदार बन जाते हैं. इससे कम सेवा अवधि होने पर नियमित पेंशन का लाभ नहीं मिलता.
क्या है पेंशन का फॉर्मूला?
पेंशन की राशि आपके अंतिम 60 महीनों की औसत सैलरी और कुल सेवा वर्षों पर निर्भर करती है. EPFO एक तय फॉर्मूला अपनाता है:
पेंशन = (पिछले 60 महीनों की औसत सैलरी × कुल सेवा वर्ष) / 70
यानी जितने ज्यादा साल आप नौकरी करेंगे, पेंशन उतनी ही ज्यादा बनेगी. यहां औसत वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये मानी जाती है, यदि आपने उच्च पेंशन विकल्प नहीं चुना है.
15,000 रुपये सैलरी पर कितना मिलेगा?
मान लीजिए आपकी पेंशन योग्य सैलरी 15,000 रुपये है और आपने 10 साल सेवा दी है. तब गणित होगा:
(15,000 × 10) / 70 = लगभग 2,143 रुपये प्रतिमाह.
अगर आपकी सेवा अवधि 25 साल है, तो यही गणित बदल जाएगा:
(15,000 × 25) / 70 = करीब 5,357 रुपये प्रतिमाह.
इससे साफ है कि लंबी सेवा का सीधा फायदा पेंशन पर पड़ता है. इसलिए करियर में स्थिरता और लंबी अवधि की नौकरी भविष्य की आय को मजबूत बनाती है. रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय इस फॉर्मूले को समझना बेहद जरूरी है, ताकि बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा को लेकर कोई भ्रम न रहे.
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