1 करोड़ रुपये कमाने का सपना हर निवेशक देखता है, लेकिन रास्ता साफ होना जरूरी है. सिर्फ ज्यादा निवेश नहीं, सही एसेट एलोकेशन सफलता की कुंजी है. 10 साल की अवधि में ग्रोथ और सुरक्षा दोनों का संतुलन अहम होता है. अनुशासित SIP और समझदारी भरा पोर्टफोलियो आपको करोड़पति बना सकता है.
₹1 करोड़ का टारगेट आसान नहीं, लेकिन सही एसेट मिक्स से मुमकिन. (Image:AI)
75 फीसदी इक्विटी से बनेगा ग्रोथ इंजन
किसी भी आक्रामक लेकिन संतुलित पोर्टफोलियो की नींव इक्विटी म्यूचुअल फंड होते हैं. कुल निवेश का करीब 75 फीसदी हिस्सा डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड में रखा जा सकता है, जिसमें स्मॉल और मिडकैप कंपनियों की हिस्सेदारी थोड़ी ज्यादा हो. लंबी अवधि में छोटी और मध्यम कंपनियां तेजी से बढ़ने की क्षमता रखती हैं. अलग-अलग सेक्टर में निवेश करने से जोखिम कम होता है और एक उद्योग पर निर्भरता घटती है. 10 साल की अवधि बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलने के लिए पर्याप्त मानी जाती है, इसलिए इक्विटी को ग्रोथ इंजन कहा जाता है.
10 फीसदी डेट और 15 फीसदी गोल्ड से संतुलन
हर निवेश योजना में सुरक्षा का हिस्सा भी जरूरी होता है. करीब 10 फीसदी रकम डेट या डेट जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में रखने से आपात स्थिति में तुरंत पैसा मिल सकता है. बाजार में गिरावट आने पर यही हिस्सा आपको घबराकर इक्विटी बेचने से बचाता है. वहीं 15 फीसदी निवेश सोने में रखना फायदेमंद माना जाता है. सोना अक्सर शेयर बाजार से अलग दिशा में चलता है और महंगाई से सुरक्षा देता है. इस तरह 75-10-15 का फॉर्मूला ग्रोथ और स्थिरता दोनों का संतुलन बनाता है.
टैक्स प्लानिंग भी उतनी ही जरूरी
निवेश से मिलने वाला रिटर्न टैक्स के बाद ही आपके हाथ में आता है, इसलिए टैक्स नियम समझना जरूरी है. इक्विटी म्यूचुअल फंड को एक साल से ज्यादा रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स कम दर पर लगता है, जबकि एक साल से पहले बेचने पर ज्यादा टैक्स देना पड़ता है. डेट फंड्स पर आपकी आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है. ऐसे में कुछ हाइब्रिड फंड टैक्स के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकते हैं. सोने पर भी एक साल से ज्यादा होल्डिंग के बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है.
अनुशासन और समीक्षा से मिलेगा बड़ा फायदा
10 साल में करोड़पति बनने का रास्ता सिर्फ एसेट एलोकेशन से नहीं, बल्कि अनुशासन से भी जुड़ा है. नियमित SIP के जरिए निवेश करने से कंपाउंडिंग का असर दिखता है. समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा और जरूरत पड़ने पर रीबैलेंस करना जरूरी है. सही रणनीति, धैर्य और टैक्स समझ के साथ 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करना संभव है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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