फेडरल रिजर्व के मुताबिक, भले ही पिछले साल कार्ड डिफॉल्ट के मामले कुछ स्थिर हुए हों, लेकिन लोगों पर क्रेडिट कार्ड का कुल बकाया तेजी से बढ़ा है. तीसरी तिमाही में यह रकम 1.23 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जो एक साल पहले के मुकाबले करीब 5.75 फीसदी ज्यादा है.
औसतन कितना कर्ज और कितना ब्याज?
क्रेडिट ब्यूरो ट्रांसयूनियन की रिपोर्ट के अनुसार, इस समय एक व्यक्ति पर औसतन 6,500 डॉलर से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बकाया है. बैंकरेट कैलकुलेटर के मुताबिक, अगर कोई ग्राहक इस रकम को एक साल में चुकाना चाहे तो उसे हर महीने करीब 608 डॉलर देने होंगे. इस दौरान वह करीब 800 डॉलर सिर्फ ब्याज के रूप में चुका देगा यानी कर्ज से ज्यादा नुकसान ब्याज का हो रहा है.
क्या क्रेडिट कार्ड कंपनी ब्याज घटा सकती है?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कोशिश करना हमेशा फायदेमंद होता है. नेशनल फाउंडेशन फॉर क्रेडिट काउंसलिंग के प्रवक्ता ब्रूस मैक्लैरी के मुताबिक, अगर आप समय पर भुगतान करते रहे हैं और आपका क्रेडिट स्कोर 740 या उससे ज्यादा है, तो कार्ड कंपनी से ब्याज दर कम करने की मांग की जा सकती है. भले ही कंपनी ब्याज दर में 1 से 3 फीसदी की ही कटौती करे, लेकिन इससे भी लंबे समय में अच्छी खासी बचत हो सकती है.
कार्ड कंपनी से बात कैसे करें?
ब्याज दर कम कराने के लिए अपने कार्ड के पीछे दिए कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करें। बातचीत के दौरान शालीन और आत्मविश्वास भरा रवैया रखें. अगर कभी भुगतान में देरी हुई हो, तो उसका कारण साफ-साफ बताने के लिए तैयार रहें. अगर आपका क्रेडिट स्कोर पहले से बेहतर हुआ है, तो आप यह भी कह सकते हैं कि आपने हाल ही में अपना क्रेडिट प्रोफाइल रिव्यू किया है और बेहतर स्कोर के आधार पर ब्याज दर में रिव्यू चाहते हैं.
अगर ब्याज कम न हो तो क्या करें?
अगर कार्ड कंपनी सीधे ब्याज दर घटाने से मना कर दे, तो बातचीत यहीं खत्म न करें. आप बैलेंस ट्रांसफर जैसे विकल्प पूछ सकते हैं, जिसमें बकाया रकम को उसी कंपनी के किसी कम ब्याज वाले कार्ड में ट्रांसफर किया जा सकता है. कंपनियां नए ग्राहकों को जोड़ने में काफी खर्च करती हैं, इसलिए वे अच्छे भुगतान रिकॉर्ड वाले पुराने ग्राहकों को खोना नहीं चाहतीं.
महीने में दो बार भुगतान भी है फायदेमंद
अगर ब्याज दर कम न हो पाए, तो भुगतान के तरीके में बदलाव भी मददगार हो सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, महीने में एक बार की जगह दो बार भुगतान करने से ब्याज का बोझ कम किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर, अगर आपका पैसा दो हफ्ते में आती है, तो उसी हिसाब से भुगतान करने से ब्याज जल्दी घटता है और कुल रकम कम बनती है.
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