निर्मला सीतारमण के मुताबिक बजट 2026-27 पूरी तरह स्वतंत्र रूप से तैयार किया गया है और इसका भारत अमेरिका ट्रेड डील से कोई संबंध नहीं है. सरकार अब मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और बैंकिंग सुधारों पर बजट के बाहर भी लगातार काम करेगी. भारत को चाइना प्लस वन रणनीति का सबसे मजबूत विकल्प बताया गया है.
बिजनेस न्यूज वेबसाइट फाइनेंशियल एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में सीतारमण ने कहा कि सुधार एक सतत प्रक्रिया है और हर बार बजट के जरिए ही इन्हें लाना जरूरी नहीं होता. सरकार अब लगातार पॉलिसी एक्शन, ग्लोबल इनवेस्टर्स से संवाद और सेक्टर आधारित पहलों के जरिए सुधारों को आगे बढ़ाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि हालिया भारत अमेरिका ट्रेड डील को बजट से जोड़कर देखना सही नहीं है.
वैश्विक निवेशकों को साफ संदेश
वित्त मंत्री ने विदेश निवेशकों को भारत में निवेश बढ़ाने का खुला न्योता दिया. उन्होंने कहा कि अगर दुनिया के लिए चाइना प्लस वन रणनीति फायदेमंद है, तो उसका सबसे बेहतर विकल्प भारत है. सीतारमण ने बताया कि नॉर्वे और कनाडा जैसे देशों के निवेशक भारत की रियल इकोनॉमी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और उन्हें भारत में बेहतर रिटर्न नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नॉर्वे और कनाडा सहित ईएफटीए देशों के साथ निवेश को लेकर बातचीत और तेज की जाएगी. ईएफटीए के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत 100 बिलियन डॉलर के निवेश का वादा अभी भी पूरी तरह पाइपलाइन में है.
मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी पर फोकस
सीतारमण ने दोहराया कि सरकार की ग्रोथ रणनीति का केंद्र मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर रहेगा, चाहे वह बड़े उद्योग हों या छोटे और मझोले उद्यम. इसके साथ ही टेक्नोलॉजी, एफिशिएंसी, स्किलिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और इससे जुड़ी सेवाओं पर भी सरकार का खास जोर रहेगा. उनका कहना है कि यही सेक्टर भारत की लंबी अवधि की विकास कहानी को मजबूत करेंगे.
राजकोषीय संतुलन पर सरकार का रुख
राजकोषीय घाटे को लेकर पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार को संतुलन बनाकर चलना होगा. न तो बहुत सख्त फिस्कल कंसोलिडेशन संभव है और न ही बहुत ढीला. उन्होंने कहा कि जीएसटी, इनकम टैक्स और कस्टम ड्यूटी में पहले दी गई राहतों के चलते राजस्व में उछाल आने में थोड़ा वक्त लग सकता है, लेकिन सरकार ग्रोथ और फिस्कल अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखेगी.
विकसित भारत के लिए बैंकिंग सेक्टर की तैयारी
सीतारमण ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए गठित हाई लेवल बैंकिंग कमेटी पर भी बात की. उन्होंने कहा कि यह समिति पहले की नरसिम्हम और पी जे नायक समितियों से अलग है. इसका मकसद यह देखना है कि 2047 के भारत के लिए बैंकिंग सिस्टम को और मजबूत कैसे बनाया जाए. वित्त मंत्री ने कहा कि आज बैंक मजबूत स्थिति में हैं और यह पहले किए गए सुधारों का ही नतीजा है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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