बजट इसलिए फेल नहीं होता कि आपमें अनुशासन की कमी है, बल्कि इसलिए फेल होता है क्योंकि आप ‘काल्पनिक आंकड़ों’ पर बजट बनाते हैं. बैंक का एनालाइजर आपके हर UPI, कार्ड पेमेंट और EMI को ऑटोमैटिक तरीके से शॉपिंग, खाने-पीने और बिलों जैसी कैटेगरी में बांट देता है। इससे आपको अपनी असल आदतों का पता चलता है.
सबसे पहले देखें एक सामान्य महीना
बैंक ऐप में जाकर ऐसा महीना देखें जब आपकी जिंदगी सामान्य रही हो. न तो ऐसा महीना चुनें जब आपने बहुत बचत की हो और न ही त्योहार या छुट्टियों वाला महीना.
खर्च को 2 हिस्सों में बांटें
स्पेंड एनालाइजर खर्च को कई कैटेगरी में दिखाता है, लेकिन आपको इसे दो हिस्सों में समझना चाहिए.
- फिक्स्ड खर्च: EMI, बीमा प्रीमियम, स्कूल फीस, मोबाइल प्लान, सब्सक्रिप्शन, सोसाइटी चार्ज आदि. ये खर्च हर महीने लगभग तय रहते हैं.
- फ्लेक्सिबल खर्च: ग्रॉसरी, बाहर खाना, ट्रांसपोर्ट, शॉपिंग और ऑनलाइन खरीदारी.
फ्लेक्सिबल खर्च ही वो हिस्सा है, जहां आप बदलाव कर सकते हैं.
रोज-रोज नहीं, औसत खर्च देखें
हर दिन खर्च ट्रैक करना जरूरी नहीं है. बेहतर तरीका है कि पिछले 3 महीनों का औसत खर्च देखें. मान लीजिए कि आप हर महीने फूड डिलीवरी पर करीब 9,000 रुपये खर्च करते हैं. ऐसे में अगले महीने का बजट सीधे 5,000 रुपये रखना मुश्किल होगा. बेहतर होगा कि पहले इसे 7,500 रुपये तक लाने की कोशिश करें और फिर धीरे-धीरे कम करें.
हर 3 महीने में करें समीक्षा
स्पेंड एनालाइजर का असली फायदा तब मिलता है जब आप समय-समय पर पैटर्न देखते हैं. 3 महीने में एक बार देखें कि कहीं खर्च धीरे-धीरे बढ़ तो नहीं रहा, EMI ज्यादा तो नहीं हो गई या बेकार के सब्सक्रिप्शन तो नहीं जुड़ गए. यही सही समय होता है अनावश्यक सब्सक्रिप्शन बंद करने या आने वाले बड़े खर्च की तैयारी करने का.
बजट को सजा नहीं, योजना समझें
अगर स्पेंड एनालाइजर दिखाता है कि किसी कैटेगरी में खर्च ज्यादा है, तो इसे गलती न समझें. इसे एक जानकारी की तरह देखें. असल डेटा के आधार पर बना बजट ही लंबे समय तक टिकता है.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.