क्या होता है सिक्योर्ड लोन?
सिक्योर्ड लोन वह होता है, जिसमें बैंक या फाइनेंस कंपनी को कोई गिरवी या गारंटी दी जाती है. यह गिरवी घर, जमीन, गाड़ी, फिक्स्ड डिपॉजिट, गोल्ड या कोई दूसरी वैल्यूएबल संपत्ति हो सकती है. बैंक को यह भरोसा होता है कि अगर ग्राहक लोन नहीं चुका पाया, तो वह गिरवी रखी गई संपत्ति बेचकर अपनी रकम वसूल सकता है. इसी वजह से सिक्योर्ड लोन पर ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होती है और लोन की राशि भी ज्यादा मिल सकती है. होम लोन, कार लोन, गोल्ड लोन और लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी आदि सिक्योर्ड लोन के उदाहरण हैं.
सिक्योर्ड लोन के फायदे
सिक्योर्ड लोन का सबसे बड़ा फायदा कम ब्याज दर है. लॉन्ग टर्म के लिए लोन लेने वालों के लिए यह EMI को किफायती बनाता है. इसके अलावा, अच्छी गिरवी होने पर लोन अप्रूवल की संभावना भी ज्यादा रहती है और बड़ी रकम मिल सकती है. कुछ मामलों में लंबी रीपेमेंट टेन्योर भी मिलती है, जिससे मंथली बोझ कम होता है.
सिक्योर्ड लोन के नुकसान
हालांकि सिक्योर्ड लोन सस्ता होता है, लेकिन इसमें जोखिम भी जुड़ा होता है. अगर आप EMI चुकाने में चूक करते हैं, तो बैंक आपकी गिरवी रखी संपत्ति जब्त कर सकता है. साथ ही, लोन प्रोसेसिंग में समय ज्यादा लग सकता है क्योंकि संपत्ति के दस्तावेजों की जांच होती है.
क्या होता है अनसिक्योर्ड लोन?
अनसिक्योर्ड लोन वह होता है, जिसमें किसी तरह की गिरवी देने की जरूरत नहीं होती. बैंक आपकी आय, नौकरी की स्टेबिलिटी और क्रेडिट स्कोर के आधार पर लोन देता है. पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड लोन और एजुकेशन लोन (कुछ मामलों में) अनसिक्योर्ड लोन की कैटेगरी में आते हैं.
अनसिक्योर्ड लोन के फायदे
अनसिक्योर्ड लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखनी पड़ती. इसलिए प्रक्रिया आसान और तेज होती है. कई बार तो कुछ ही घंटों या एक-दो दिनों में लोन मिल जाता है. अचानक मेडिकल इमरजेंसी या शादी जैसे खर्चों के लिए यह लोन मददगार साबित होता है.
अनसिक्योर्ड लोन के नुकसान
गिरवी न होने की वजह से बैंक का जोखिम ज्यादा होता है, इसलिए अनसिक्योर्ड लोन पर ब्याज दर ज्यादा होती है. साथ ही, लोन की राशि सीमित रहती है और रीपेमेंट टेन्योर भी कम हो सकती है. कमजोर क्रेडिट स्कोर वालों के लिए ऐसे लोन का अप्रूवल मुश्किल हो सकता है.
ब्याज दर और EMI में क्या फर्क?
अगर ब्याज दर की बात करें, तो आमतौर पर सिक्योर्ड लोन पर ब्याज कम होता है, जबकि अनसिक्योर्ड लोन महंगा पड़ता है. उदाहरण के तौर पर, होम लोन की ब्याज दर पर्सनल लोन से काफी कम होती है. कम ब्याज का सीधा असर EMI पर पड़ता है और कुल चुकाई जाने वाली रकम भी कम होती है.
कौन सा लोन आपके लिए सही?
अगर आपके पास गिरवी रखने के लिए संपत्ति है और आप लंबी अवधि के लिए बड़ी रकम चाहते हैं, तो सिक्योर्ड लोन बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं, अगर आपको जल्दी पैसों की जरूरत है और आप किसी संपत्ति को जोखिम में नहीं डालना चाहते, तो अनसिक्योर्ड लोन सही रहेगा. फैसला लेते समय अपनी आय, EMI चुकाने की क्षमता और भविष्य की योजनाओं को जरूर ध्यान में रखें.
लोन लेने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
लोन लेने से पहले ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और शर्तों को ध्यान से पढ़ें. EMI कैलकुलेट कर देखें कि क्या वह आपके बजट में फिट बैठती है या नहीं. साथ ही, समय पर EMI चुकाकर अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखना भी बेहद जरूरी है.
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