एक ही पॉलिसी में सब कुछ
यह एक तरह का जनरल इंश्योरेंस प्लान होता है, जिसमें एक ही पॉलिसी में कई तरह की सुरक्षा मिलती है. जानकारों के मुताबिक, पारंपरिक बीमा में हेल्थ और लाइफ कवर अलग-अलग होते हैं, लेकिन पेट इंश्योरेंस में मेडिकल खर्च, मौत की स्थिति में आर्थिक मदद और कुछ मामलों में चोरी या खो जाने का कवर भी शामिल किया जा सकता है.
मेडिकल खर्च का कवर
इस पॉलिसी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर आपके पालतू जानवर को बीमारी या हादसे की वजह से इलाज की जरूरत पड़ती है, तो अस्पताल, सर्जरी और इलाज का खर्च कवर हो सकता है. कैंसर, किडनी फेल्योर या अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च भी कई प्लान में शामिल होता है. इसके अलावा डायबिटीज, थायरॉइड की समस्या, पैंक्रियाटाइटिस जैसी लंबी चलने वाली बीमारियों के इलाज का खर्च भी कुछ योजनाओं में कवर किया जाता है. कई पॉलिसी में ओपीडी यानी सामान्य डॉक्टर विजिट और बिना सर्जरी वाले इलाज का खर्च भी शामिल होता है.
चोरी या खोने पर भी मिल सकता है कवर
कुछ पेट इंश्योरेंस प्लान में ऐसा कवर भी होता है जिसमें अगर आपका पालतू जानवर चोरी हो जाए या लंबे समय तक खोजने के बाद भी नहीं मिले, तो बीमा कंपनी तय रकम का भुगतान कर सकती है.
थर्ड-पार्टी लायबिलिटी भी शामिल
अगर आपका पालतू किसी दूसरे आदमी को चोट पहुंचा दे या किसी की संपत्ति को नुकसान पहुंचा दे, तो उससे जुड़े कानूनी खर्च और मुआवजा भी कुछ पॉलिसी में कवर होता है. इसी वजह से इसे सिर्फ हेल्थ प्लान नहीं, बल्कि एक कॉम्प्रिहेंसिव प्लान माना जाता है.
अंतिम संस्कार के खर्च भी खर्च देती है बीमा कंपनी
अगर पालतू जानवर की मौत बीमारी या दुर्घटना से हो जाए या डॉक्टर की सलाह पर उसे दया मृत्यु देनी पड़े, तो बीमा कंपनी तय बीमित राशि दे सकती है. कुछ योजनाएं अंतिम संस्कार या दफनाने के खर्च के लिए भी निश्चित रकम देती हैं.
कौन ले सकता है यह पॉलिसी
आमतौर पर यह बीमा घरेलू कुत्तों और बिल्लियों के लिए उपलब्ध होता है. ज्यादातर योजनाओं में पालतू की उम्र करीब 3 महीने से शुरू होकर एक तय अधिकतम उम्र तक हो सकती है. साथ ही कुछ कंपनियां RFID टैगिंग, मेडिकल रिपोर्ट देने, एक से ज्यादा पालतू जानवर होने या क्लेम-फ्री सालों पर डिस्काउंट भी देती हैं.
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