SIP Investment Tips: म्यूचुअल फंड में एसआईपी से पैसा बढ़ाया जा सकता है, लेकिन जल्दी रिटर्न की चाह और बाजार गिरावट का डर निवेशकों को प्रभावित करता है. इसे ध्यान में रखते हुए 7-5-3-1 एसआईपी नियम बनाया गया है, जो निवेशकों को लंबे समय तक अनुशासित रहने और बेहतर रिटर्न पाने में मदद करता है. बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य हैं, लेकिन लंबे समय में SIP से कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है और नुकसान की संभावना कम हो जाती है.
इस नियम में चार अहम बातें हैं. पहली बात 7 साल की है. मतलब एसआईपी को कम से कम 7 साल तक चलाते रहना चाहिए. इक्विटी फंड में बाजार ऊपर-नीचे होता रहता है. छोटे समय में घाटा दिख सकता है, लेकिन 7 साल या उससे ज्यादा समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है. पिछले कई सालों के डेटा से पता चलता है कि इतने समय में नुकसान की संभावना बहुत कम हो जाती है और अच्छे रिटर्न मिलने की उम्मीद ज्यादा रहती है. ये समय धैर्य रखने के लिए बहुत जरूरी है.
अलग-अलग तरह की कंपनियों में करें निवेश
दूसरी बात 5 तरह की डाइवर्सिफिकेशन की है. इसे 5 फिंगर फ्रेमवर्क भी कहते हैं. निवेश को 5 अलग-अलग तरह की कंपनियों या फंड में बांटना चाहिए. जैसे क्वालिटी स्टॉक वाली कंपनियां जो मजबूत और भरोसेमंद होती हैं. वैल्यू स्टॉक जो अभी सस्ते हैं लेकिन आगे बढ़ने की क्षमता रखते हैं.
जीएआरपी स्टॉक जो अच्छी ग्रोथ वाली हैं लेकिन कीमत उचित है. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, मिड या स्मॉल कैप स्टॉक जहां रिस्क ज्यादा लेकिन रिटर्न भी बड़ा हो सकता है. और ग्लोबल स्टॉक या फंड जो भारत के बाहर की कंपनियों में निवेश करते हैं. इससे अगर एक सेक्टर गिरे तो बाकी से बैलेंस हो जाता है और रिस्क कम होता है.
लंबे समय के लिए करें निवेश
तीसरी बात 3 तरह की मानसिक चुनौतियों की है. निवेश के दौरान तीन मुश्किल दौर आते हैं. पहला जब रिटर्न 7-10 प्रतिशत के आसपास रहते हैं और लगता है कि ज्यादा मिलना चाहिए. दूसरा जब रिटर्न कम लगते हैं और फिक्स्ड डिपॉजिट बेहतर दिखते हैं. तीसरा जब बाजार गिरता है और नेगेटिव रिटर्न दिखते हैं, तब डर लगता है और पैसा निकालने का मन करता है. ये तीनों दौर हर निवेशक के साथ आते हैं. नियम कहता है कि इनसे डरना नहीं, बल्कि धैर्य रखना चाहिए. लंबे समय में बाजार ऊपर जाता है.
एसआईपी की रकम भी बढ़ाएं
चौथी और आखिरी बात 1 आदत की है. हर साल एसआईपी की रकम बढ़ानी चाहिए. जैसे सैलरी बढ़ती है वैसे ही निवेश भी बढ़ाएं. ये स्टेप-अप एसआईपी कहलाता है. इससे कंपाउंडिंग का फायदा और तेजी से मिलता है और लक्ष्य जल्दी पूरे होते हैं. जैसे रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई के लिए. छोटी रकम से शुरू करके साल-दर-साल बढ़ाने से बड़ा कोष बन जाता है.
ये 7-5-3-1 नियम छोटे-मध्यम निवेशकों के लिए बहुत उपयोगी है. ये बताता है कि निवेश सिर्फ पैसा लगाना नहीं, बल्कि सही सोच और अनुशासन का खेल है. लंबा समय, विविधता, मानसिक मजबूती और सालाना बढ़ोतरी से एसआईपी से अच्छा फायदा मिल सकता है. बाजार के उतार-चढ़ाव में भी घबराना नहीं. अगर आप नियमित रहें तो समय के साथ धन बढ़ता चला जाएगा. ये नियम याद रखें तो निवेश का सफर आसान हो सकता है.
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