क्या अब भारत, रूस से तेल नहीं खरीदेगा?
इस पर एनर्जी एक्सपर्ट नरेन्द्र तनेजा साफ कहते हैं कि सरकार ने रूस से तेल खरीदने को कभी मना नहीं किया है. रही बात वेनेजुएला की, तो उनके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडारहै, इसमें दो राय नहीं. लेकिन आज वहां उत्पादन मात्र 8 से 9 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है, जबकि भारत की जरूरत इससे कहीं ज्यादा है. अगर हम वहां से 2 लाख बैरल मंगा भी लें, तो वैश्विक सप्लाई में बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ने वाला. वेनेजुएला का वास्तविक प्रभाव तब दिखेगा जब वह अपना उत्पादन बढ़ाकर 20 लाख बैरल तक ले जाए, जिसमें 1.5 से 2 साल लग सकते हैं.
रूस बनाम वेनेजुएला: किसका तेल कितना सस्ता?
रूस हमें तेल तो दे रहा है, लेकिन अब उसने ‘डिस्काउंट’ देना काफी कम कर दिया है.
रूसी तेल की कीमत: आजकल हमें रूसी तेल करीब $60 से $65 (₹5,100 से ₹5,525) प्रति बैरल के आसपास मिल रहा है. इस पर मिलने वाली छूट अब सिमटकर केवल $3-$4 (₹255-₹340) प्रति बैरल रह गई है.
वेनेजुएला के तेल की कीमत: वेनेजुएला जिस रेट पर दूसरे देशों को तेल ऑफर कर रहा है, वो करीब $51 (लगभग ₹4,335) प्रति बैरल के आसपास है. यानी बेस प्राइस में ही यह रूस से $10-$14 (₹850 से ₹1,190) तक सस्ता है. अगर इसी रेट पर सौदा होता है, तो वेनेजुएला का तेल रूस के मुकाबले भारत के लिए किफायती होगा.
क्वालिटी और रिफाइनिंग का खेल
यहां एक तकनीकी पेंच है. रूस का तेल ‘मीडियम’ क्वालिटी का होता है, जिसे रिफाइन करना आसान है. वहीं, वेनेजुएला का तेल बहुत ‘भारी और गाढ़ा’ होता है. इसे साफ करने के लिए एडवांस मशीनों की जरूरत होती है. भारत की खुशकिस्मती यह है कि हमारे पास रिलायंस और नायरा जैसी कंपनियां हैं, जिनके पास दुनिया की सबसे बेहतरीन रिफाइनरी हैं, जो इस ‘कीचड़ जैसे गाढ़े’ तेल से भी बढ़िया पेट्रोल निकाल सकती हैं.
जहाज का किराया और दूरी
रूस से भारत: तेल आने में करीब 20-25 दिन लगते हैं.
वेनेजुएला से भारत: यह दुनिया के दूसरे छोर पर है, यहां से तेल आने में करीब 40-50 दिन का समय और लगभग दोगुना किराया लगता है.
मगर SBI का तर्क सीधा है: भले ही जहाज का किराया $2-$3 ज्यादा लगे, लेकिन अगर वेनेजुएला हमें $10 से $12 (₹850-₹1,020) प्रति बैरल का डिस्काउंट देता है, तो लंबी दूरी के बावजूद वह तेल हमें रूस के मुकाबले सस्ता ही पड़ेगा.
क्या कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
यह सबसे बड़ा सवाल है. अगर सरकार इस पूरी $3 बिलियन (₹27,000 करोड़) की बचत का फायदा सीधे जनता को देने का मन बना ले, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 से ₹5 प्रति लीटर की कटौती आसानी से की जा सकती है.
बदलता समीकरण
एक समय था जब भारत अपनी जरूरत का 40% तेल अकेले रूस से ले रहा था. लेकिन जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, यह घटकर 30-35% के बीच आ गया है. क्योंकि भारत अपनी विदेश नीति के तहत अलग-अलग देशों से तेल ले रहा है.
वेनेजुएला का तेल भारत के लिए एक ‘लॉटरी’ जैसा साबित हो सकता है. अगर अगले कुछ महीनों में वहां से तेल के बड़े जहाज भारतीय बंदरगाहों पर लंगर डालते हैं, तो उम्मीद की जा सकती है कि पेट्रोल पंप पर मीटर की रीडिंग कुछ नीचे आए और महंगाई से थोड़ी राहत मिले.
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