क्या होता है एक्सपेंस-टू-इनकम रेशियो?
एक्सपेंस-टू-इनकम रेशियो यह बताता है कि आपकी कुल आय का कितने फीसदी हिस्सा खर्च हो रहा है. यह दिखने में एक छोटा सा नंबर लगता है, लेकिन इससे बड़े फाइनेशियल संकेत मिलते हैं
कमाई बढ़ी पर बचत क्यों नहीं?
ज्यादातर लोगों को लगता है कि सैलरी बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी, लेकिन असल में खर्च भी चुपके से बढ़ जाते हैं. इसे ‘लाइफस्टाइल क्रीप’ कहते हैं. उदाहरण के लिए, अगर आप 1 लाख कमाते थे और 65 हजार खर्च करते थे, तो आपका एक्सपेंस-टू-इनकम रेशियो 65% था. लेकिन अगर अब आप 1.3 लाख कमाकर 1.05 लाख खर्च कर रहे हैं, तो आपकी स्थिति पहले से खराब हो गई है.
क्यों जरूरी है एक्सपेंस-टू-इनकम रेशियो को ट्रैक करना?
- बचत का दबाव कम करता है: जब खर्च कमाई के 70-75% से ऊपर निकल जाता है, तो बचत करना बोझ लगने लगता है. यह एक्सपेंस-टू-इनकम रेशियो आपको बताता है कि समस्या आपकी कमाई में है या खर्च करने की आदतों में.
- बड़े फैसलों में मदद: नई कार या घर लेने से पहले यह एक्सपेंस-टू-इनकम रेशियो देखें. अगर आपका मौजूदा खर्च पहले से ही हाई है, तो नई EMI आपको मुसीबत में डाल सकती है.
- इमरजेंसी के लिए तैयारी: अगर आपका एक्सपेंस-टू-इनकम रेशियो कम है, तो किसी भी मुसीबत के समय आपके पास पैसे बचेंगे. हाई रेशियो का मतलब है कि आप आर्थिक रूप से रिस्क में हैं.
कितना होना चाहिए यह रेश्यो?
इसका कोई एक तय नियम नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार:
- 60% से कम: बहुत अच्छा (आप आसानी से निवेश और बचत कर सकते हैं).
- 60% से 70%: ठीक है, लेकिन सावधानी जरूरी है.
- 75% से ऊपर: खतरे की घंटी (आपको तुरंत अपने खर्चों में कटौती करने की जरूरत है).
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल: अगर मेरी आय हर महीने बदलती है तो क्या करूं?
जवाब- पिछले 3-6 महीनों की औसत आय लेकर एक्सपेंस-टू-इनकम रेशियो निकालें.
सवाल: क्या यह डिटेल बजटिंग की जगह ले सकता है?
जवाब- नही. बजट बताता है पैसा कहां जा रहा है. यह एक्सपेंस-टू-इनकम रेशियो बताता है पूरी फाइनेंशियल तस्वीर कैसी है.
सवाल: अगर मेरा रेशियो अभी ज्यादा है लेकिन अस्थायी है?
जवाब- अगर यह प्लान के तहत और सीमित समय के लिए है, तो ठीक है. समस्या तब होती है जब ज्यादा खर्च नई आदत बन जाए.
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