कॉन्ट्रा म्यूचुअल फंड एक प्रकार के इक्विटी म्यूचुअल फंड होते हैं, जिनकी निवेश रणनीति बाजार के मौजूदा रुझान (Trend) के बिल्कुल विपरीत होती है. जब बाजार किसी विशेष सेक्टर या शेयर के पीछे भाग रहा होता है, तब कॉन्ट्रा फंड का मैनेजर जानबूझकर उन कंपनियों को चुनता है जिन्हें बाजार ने नजरअंदाज कर दिया है. इस फंड की मुख्य रणनीति ‘वैल्यू इन्वेस्टिंग’ पर आधारित होती है.
खराब प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर दांव
मैनेजर ऐसी कंपनियों के स्टॉक्स में पैसा लगाते हैं जो वर्तमान में खराब प्रदर्शन (Underperforming) कर रही हैं, दबाव में हैं या जिनकी वास्तविक कीमत (Intrinsic Value) के मुकाबले उनका मार्केट प्राइस काफी कम है. मैनेजर का मानना होता है कि ये कंपनियां बुनियादी तौर पर (Fundamentally) मजबूत हैं और भविष्य में जब बाजार अपनी गलती सुधारेगा, तो ये शेयर मल्टीबैगर रिटर्न देंगे.
आम म्यूचुअल फंड्स से कैसे अलग है इसकी रणनीति?
ज्यादातर म्यूचुअल फंड ‘मोमेंटम’ या ‘ग्रोथ’ स्टाइल को फॉलो करते हैं, यानी वे उन्हीं शेयरों को खरीदते हैं जो तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके विपरीत, कॉन्ट्रा फंड ‘बाय लो, सेल हाई’ के सिद्धांत को बहुत ही आक्रामक तरीके से अपनाता है. एक सामान्य निवेशक के लिए यह पहचानना बहुत मुश्किल है कि कौन सा शेयर केवल थोड़े समय के लिए गिर रहा है और कौन सा शेयर वास्तव में डूब रहा है. यहीं पर कॉन्ट्रा फंड का काम शुरू होता है.
फंड मैनेजर गहन रिसर्च के जरिए यह पता लगाते हैं कि क्या किसी कंपनी का शेयर किसी अस्थायी संकट जैसे खराब तिमाही नतीजे या कोई विवाद की वजह से गिरा है. अगर कंपनी के एसेट और बिजनेस मॉडल मजबूत हैं, तो वे उसमें निवेश कर देते हैं. यह उन निवेशकों के लिए बेहतरीन है जिनके पास खुद रिसर्च करने का समय नहीं है.
रिस्क और रिटर्न
कॉन्ट्रा फंड में निवेश करना ‘धैर्य’ की परीक्षा देने जैसा है. चूंकि फंड मैनेजर उन शेयरों में पैसा लगाता है जो अभी नहीं चल रहे हैं, इसलिए यह संभव है कि शॉर्ट टर्म (1-2 साल) में आपको बहुत कम या नकारात्मक (Negative) रिटर्न मिले. यह फंड तुरंत मुनाफा देने की गारंटी नहीं देता क्योंकि किसी शेयर को अपनी खराब स्थिति से उबरने में समय लगता है. मुख्य रूप से ये फंड लंबी अवधि के लिए ही बने हैं. जब बाजार में सुधार आता है और नजरअंदाज किए गए सेक्टर चमकने लगते हैं तो कॉन्ट्रा फंड अन्य सभी श्रेणियों को पीछे छोड़ देते हैं.
किसे निवेश करना चाहिए?
कॉन्ट्रा म्यूचुअल फंड हर किसी के लिए नहीं हैं. इसमें निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता और समय सीमा (Time Horizon) को परखना जरूरी है:-
- धैर्यवान निवेशक: अगर आप बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर घबरा जाते हैं, तो यह फंड आपके लिए नहीं है.
- लंबी अवधि का नजरिया: इस फंड में तभी पैसा लगाएं जब आप कम से कम 5 साल या उससे अधिक समय तक निवेशित रह सकें.
- पोर्टफोलियो विविधीकरण: अनुभवी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए 10-15% हिस्सा कॉन्ट्रा फंड में रखते हैं.
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