हेल्थ इंश्योरेंस
हेल्थ इंश्योरेंस आपको स्वस्थ नहीं बनाता, लेकिन बीमारी या हादसे के समय आपकी सालों की बचत को बचाता है. आज के समय में अस्पताल का खर्च अचानक और बहुत ज्यादा हो सकता है. एक सर्जरी, आईसीयू में कुछ दिन या लंबा इलाज ये सब मिलकर आपकी कई साल की बचत एक झटके में खत्म कर सकते हैं. कई लोग सोचते हैं कि वे फिट हैं, इसलिए जरूरत नहीं पड़ेगी या फिर कंपनी का इंश्योरेंस काफी है. लेकिन नौकरी बदल सकती है, पॉलिसी बदल सकती है और सेहत तो बिना बताए बदल ही जाती है. हेल्थ इंश्योरेंस होने का मतलब है कि इलाज का फैसला बैंक बैलेंस देखकर नहीं करना पड़े.
इमरजेंसी फंड
इमरजेंसी फंड का काम अलग है. यह आपको समय देता है. अगर नौकरी चली जाए, सैलरी लेट हो जाए, बिजनेस धीमा पड़ जाए या घर में कोई अचानक खर्च आ जाए तो घबराकर लोन लेने या निवेश बेचने की जरूरत नहीं पड़ती. अक्सर इमरजेंसी कोई बड़ी ड्रामेटिक घटना नहीं होती. यह छोटी-छोटी लेकिन परेशान करने वाली स्थितियां होती हैं जैसे मेडिकल खर्च जो इंश्योरेंस में कवर नहीं हुआ, घर की मरम्मत या परिवार की मदद की जरूरत. इमरजेंसी फंड इन झटकों को चुपचाप संभाल लेता है. इसके बिना हर छोटी समस्या भी संकट बन जाती है.
निवेश क्यों नहीं ले सकता इनकी जगह?
कई लोग सोचते हैं कि जरूरत पड़ने पर वे अपने शेयर या म्यूचुअल फंड बेच देंगे. लेकिन अगर उस समय शेयर बाजार गिरा हुआ हुआ, तो आपको घाटे में अपनी संपत्ति बेचनी पड़ेगी. इंश्योरेंस और इमरजेंसी फंड इसलिए बनाए जाते हैं ताकि आपका लॉन्ग-टर्म निवेश कभी डिस्टर्ब न हो.
कितना कवर और कितना फंड जरूरी?
हेल्थ इंश्योरेंस इतना होना चाहिए कि आपके शहर के असली अस्पताल खर्च को कवर कर सके. सिर्फ सस्ता प्रीमियम देखकर फैसला न लें. इमरजेंसी फंड कम से कम 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर होना चाहिए. अगर आप फ्रीलांसर हैं, बिजनेस करते हैं या घर में एक ही कमाने वाला है, तो यह फंड और बड़ा होना चाहिए. सही रकम से ज्यादा जरूरी है कि आपके पास यह सुरक्षा जाल हो.
कड़वी लेकिन सच्ची बात
हेल्थ इंश्योरेंस और इमरजेंसी फंड अच्छा रिटर्न नहीं देते. इनका फायदा तब दिखता है जब कुछ बुरा होता है. लेकिन वही समय होता है जब ये आपको सालों की आर्थिक तबाही से बचाते हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)-
सवाल- क्या मैं निवेश करते हुए धीरे-धीरे इमरजेंसी फंड बना सकता हूं?
जवाब- हां, निवेश पूरी तरह रोकने की जरूरत नहीं है, लेकिन पहले एक बेसिक सुरक्षा स्तर तक इमरजेंसी फंड को प्राथमिकता दें.
सवाल- क्या कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस ही काफी है?
जवाब- यह मददगार है, लेकिन अकेला पर्याप्त नहीं. नौकरी या पॉलिसी में बदलाव से अचानक गैप आ सकता है.
सवाल- क्या इमरजेंसी फंड को प्लान किए गए खर्च में इस्तेमाल करना चाहिए?
जवाब- नहीं, जो खर्च पहले से तय हैं, उनके लिए अलग बचत रखें. इमरजेंसी फंड सिर्फ अनिश्चित हालात के लिए होता है.
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