1956 के बाद विरासत में मिली संपत्ति इंडिविजुअल मानी जाती है. पिता की बिना वसीयत मौत के बाद संपत्ति पत्नी, बेटे और बेटी में बराबर बंटी थी. इसलिए दिवंगत बेटी का 1/3 हिस्सा उसके पति और बेटे को मिलेगा और उनका बंटवारे का दावा कानूनन वैध है.
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सवाल यह है कि क्या उन्हें ऐसा करने का अधिकार है? क्या किसी दिवंगत बेटी के पति और बच्चे उसके पिता की संपत्ति में हिस्सा मांग सकते हैं? यह सवाल अक्सर परिवारों में विवाद की वजह बन जाता है. मनीकंट्रोल के Ask Wallet-Wise में इसी से जुड़े एक सवाल का जवाब एक्सपर्ट ने दिया.
क्या कहता है कानून?
एक्सपर्ट के मुताबिक, 1956 से पहले जो संपत्ति पूर्वजों से मिलती थी, उसे ‘पैतृक संपत्ति’ (Ancestral Property) माना जाता था. लेकिन हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 लागू होने के बाद नियम बदल गए. अगर किसी व्यक्ति को 17 जून 1956 के बाद संपत्ति विरासत में मिलती है, तो वह उसकी इंडिविजुअल प्रॉपर्टी (Individual Property) मानी जाती है.
इस मामले में पिता को 1961 में संपत्ति मिली थी यानी 1956 के कानून के बाद. इसलिए वह संपत्ति उनकी इंडिविजुअल प्रॉपर्टी थी. 1977 में बिना वसीयत निधन होने पर यह संपत्ति उनके कानूनी वारिसों पत्नी, बेटे और बेटी में बराबर 1/3-1/3 हिस्से में बंटी मानी जाएगी. इसका मतलब है कि बेटी को भी 1/3 हिस्सा मिला था. 1999 में उसकी मौत के बाद उसका हिस्सा उसके कानूनी वारिसों (पति और बेटे) को चला गया.
गिफ्ट डीड पर क्या स्थिति?
कानून के अनुसार, मां सिर्फ अपने हिस्से (1/3) की ही गिफ्ट दे सकती थीं. पूरी संपत्ति बेटे को गिफ्ट करना कानूनी रूप से सही नहीं माना जाएगा. इसलिए बहनोई और भांजे की ओर से संपत्ति के बंटवारे की मांग कानूनी रूप से सही और वैध है.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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