मनीकंट्रोल के Ask Wallet-Wise में इसी से जुड़े एक सवाल का जवाब दिया गया है. सवाल एक ऐसे परिवार से जुड़ा है, जहां पिता का निधन साल 2022 में हुआ. उनके पीछे 6 बेटियां और 5 बेटे हैं. पिता द्वारा छोड़ी गई संपत्ति का अब तक बंटवारा नहीं हो पाया है. उन्होंने अपनी जिंदगी में एक वसीयत बनाई थी, लेकिन उसे रजिस्टर्ड नहीं कराया. जब संपत्ति का बंटवारा नहीं हुआ, तो बेटियों ने साल 2024 में कोर्ट का रुख किया और हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत अपने अधिकार की मांग की.
संपत्ति का स्वरूप जानना जरूरी
टैक्स और इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन के मुताबिक, इस मामले में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि संपत्ति का स्वरूप क्या है. पिता ने यह संपत्ति अपनी कमाई से खरीदी थी, इसलिए यह स्व-अर्जित संपत्ति मानी जाएगी. इसे न तो पैतृक संपत्ति कहा जाएगा और न ही हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) की संपत्ति. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के बाद पैतृक संपत्ति की अवधारणा काफी हद तक सीमित हो चुकी है.
उत्तराधिकार कानून के तहत वसीयत का रजिस्टर्ड होना जरूरी नहीं
जहां तक वसीयत का सवाल है, भारतीय उत्तराधिकार कानून के तहत वसीयत का रजिस्टर्ड होना जरूरी नहीं है. अगर वसीयत सही तरीके से बनाई गई है और उस पर किसी तरह की धोखाधड़ी या दबाव साबित नहीं होता, तो वह पूरी तरह वैध और कानूनी रूप से लागू मानी जाती है.
पिता की संपत्ति में बेटियां भी बराबर की हिस्सेदार
हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत बेटियों को भी बेटों के बराबर अधिकार दिया गया है यानी पिता की संपत्ति में बेटियां भी बराबर की हिस्सेदार हैं. अगर वसीयत में संपत्ति का बंटवारा किया गया है, तो उसी के अनुसार सभी वारिसों को उनका हिस्सा मिलेगा.
कानूनी वारिसों में समान रूप से बंटवारा
हालांकि, अगर वसीयत में केवल कुछ संपत्तियों का ही जिक्र है, तो जो संपत्ति वसीयत में शामिल नहीं है, उसका बंटवारा सभी कानूनी वारिसों बेटे, बेटियां, मां (अगर जीवित हों) और दादी (अगर जीवित हों) के बीच बराबर किया जाएगा. वहीं, अगर पिता ने कोई वसीयत छोड़ी ही नहीं होती, तो पूरी संपत्ति सभी कानूनी वारिसों में समान रूप से बांटी जाती. ऐसे में परिवारों को ऐसे विवादों से बचने के लिए समय रहते स्पष्ट और कानूनी रूप से मजबूत वसीयत बनवानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी उलझन न हो.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.