दुबई का रियल एस्टेट मार्केट पिछले सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है. 2025 में रिकॉर्ड 215,000 से ज्यादा ट्रांजेक्शन हुए और कुल सेल वैल्यू करीब 187 बिलियन डॉलर रही. लक्जरी प्रॉपर्टी की बिक्री बहुत तेज थी, और भारतीय निवेशक सबसे बड़े खरीदारों में से थे. अब जंग की वजह से कुछ खरीदार निर्णय टाल रहे हैं या ज्यादा नेगोशिएट कर रहे हैं. अगर जंग ज्यादा दिन चली तो सेल्स थोड़ी ठंडी पड़ सकती है, लेकिन बड़े प्राइस क्रैश की उम्मीद नहीं है. दुबई की अपील अभी भी मजबूत है क्योंकि यहां टैक्स कम है, रेजिडेंसी प्रोग्राम अच्छे हैं और रेंटल यील्ड अन्य शहरों से बेहतर है.
दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर कितना ज्यादा असर?
Jenika Ventures के CEO और फाउंडर Mr. Abhishek Raj के अनुसार, ईरान और इज़राइल के बीच हालिया तनाव से दुनियाभर के निवेशकों में थोड़ी चिंता जरूर बढ़ी है, जिनमें दुबई में निवेश करने वाले लोग भी शामिल हैं. छोटे समय के लिए खासकर विदेशी निवेशक इंतज़ार करने की रणनीति अपना सकते हैं और स्थिति को देखते रह सकते हैं. लेकिन यह समझना जरूरी है कि दुबई का रियल एस्टेट बाजार पहले भी कई क्षेत्रीय और वैश्विक संकटों के दौरान मजबूत बना रहा है. अगर कुछ समय के लिए प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त कम भी हो जाए, तो भी लंबे समय के नजरिए से निवेश करने वाले लोग बाजार से पूरी तरह बाहर नहीं जाएंगे. अक्सर अनिश्चितता के ऐसे समय में अच्छे निवेश के मौके मिलते हैं, क्योंकि लोग बेहतर कीमत पर सौदे कर सकते हैं और अपने निवेश को अलग-अलग जगहों पर बांट सकते हैं. हमें लगता है कि दुबई में प्रॉपर्टी की मांग बनी रहेगी. वहां का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और रेजिडेंसी से जुड़े फायदे निवेशकों को आकर्षित करते रहेंगे. भले ही थोड़े समय के लिए उतार-चढ़ाव आएं, लेकिन दुबई का रियल एस्टेट बाजार अभी भी मजबूत है और समझदारी से निवेश करने वालों के लिए अच्छा विकल्प बना रहेगा.
वेट-एंड-वॉच है जरूरी
लोहिया वर्ल्डस्पेस (Lohia Worldspace) के डायरेक्टर पीयूष लोहिया के अनुसार, “मध्य पूर्व की वर्तमान स्थिति निश्चित रूप से रियल एस्टेट निवेशकों को अधिक सतर्क बना रही है, खासकर दुबई जैसे बाजारों में जिन्हें लंबे समय से सुरक्षित और स्थिर निवेश गंतव्य के रूप में देखा जाता रहा है,” कहते हैं प्युष लोहिया, मैनेजिंग डायरेक्टर, लोहिया वर्ल्डस्पेस. “फिलहाल घबराहट में बिक्री देखने को नहीं मिल रही है, लेकिन खरीदारों के बीच स्पष्ट रूप से ‘वेट-एंड-वॉच’ यानी इंतज़ार और निगरानी की रणनीति अपनाई जा रही है. अल्पावधि में इससे बिक्री गतिविधि में हल्की मंदी आ सकती है, क्योंकि निवेशक नए निर्णय लेने से पहले जोखिम और समयसीमा का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं, विशेष रूप से इस वर्ष बाजार में बड़ी संख्या में नई इकाइयाँ आने की उम्मीद के बीच.
हालांकि, पिछले रुझान बताते हैं कि पारदर्शी और सुव्यवस्थित बाजारों में गुणवत्तापूर्ण रियल एस्टेट में स्पष्टता आने के बाद फिर से तेजी आती है. दुबई की मूल ताकत- मजबूत किराया रिटर्न, स्थिर मांग और सहायक नियामक ढांचा – अब भी बरकरार है, और हमें विश्वास है कि मौजूदा अनिश्चितता के बावजूद दीर्घकालिक निवेशक भरोसा स्थिर बना रहेगा.”
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर टेंशन बढ़ी तो इंडियन, पाकिस्तानी और दूसरे देशों के निवेशकों में हिचकिचाहट आ सकती है, लेकिन पूरा बाहर निकलना नहीं होगा. दुबई का मार्केट पहले भी ऐसे दौर से गुजरा है और रिकवर हो गया है. अभी मार्केट में सावधानी है, लेकिन पैनिक नहीं. निवेशक वेट एंड सी कर रहे हैं. अगर जंग कंटेन हो गई या खत्म हुई तो कॉन्फिडेंस जल्दी वापस आएगा.
दुबई का रियल एस्टेट अभी भी आकर्षक है, लेकिन शॉर्ट टर्म में थोड़ी मॉडरेशन आ सकती है. लॉन्ग टर्म में मजबूत बने रहने की उम्मीद है, क्योंकि यूएई की इकोनॉमी और पॉलिसीज मजबूत हैं. निवेशकों को सलाह है कि जल्दबाजी न करें, लेकिन अच्छे मौके पर नजर रखें. बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन दुबई जैसे शहर लंबे समय में अच्छा रिटर्न देते हैं.
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