Will Validity : वसीयत बनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है. लेकिन, इसके बारे में कई लोगों को पता नहीं होता. जैसे अगर वसीयत लिखने वाला एक सादे कागज पर बना देता है और उस पर साइन कर देता है तो इसकी मान्यता होगी या नहीं. वसीयत को मान्यता दिलाने के लिए किस तरह की प्रोसेस को अपना जरूरी होता है. इन सभी सवालों के जवाब आपको देने की कोशिश करते हैं.
भारतीय कानून के हिसाब से वसीयत बनाते से गवाह जरूरी होते हैं.
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1932 के प्रावधानों के अनुसार वसीयत का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है और न ही इसे स्टाम्प पेपर पर बनाना जरूरी है. कानून के तहत वसीयत के लिए कोई विशेष प्रारूप निर्धारित नहीं है. लिहाजा यदि अन्य आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं तो साधारण कागज पर हाथ से लिखी गई वसीयत भी मान्य होती है. इसका मतलब है कि अगर दादा अथवा माता-पिता अपने हाथ से एक सादे कागज पर वसीयत लिख देते हैं तो उसे भी कानूनन वैध माना जाएगा. यहां यह जानना जरूरी है कि वसीयत की अन्य शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए.
क्या है वसीयत की अन्य शर्तें
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 63 के अनुसार, वसीयत के वैध होने के लिए उस पर वसीयतकर्ता के हस्ताक्षर होने चाहिए और कम से कम दो गवाहों द्वारा उसका साक्ष्य होना चाहिए. लिहाजा यदि वसीयत पर वसीयतकर्ता के हस्ताक्षर तो हैं लेकिन कम से कम दो गवाहों के हस्ताक्षर नहीं हैं, तो उस दस्तावेज को कानून के तहत वैध वसीयत नहीं माना जाएगा. भले ही वसीयतकर्ता ने उसे वसीयत के रूप में मानने का इरादा किया हो और इस कागज पर बाकायदा अपना हस्ताक्षर भी किया हो.
गवाहों की उपस्थिति सबसे जरूरी
भारतीय उत्तराधिकार कानून साफ कहता है कि जब तक वसीयत पर गवाहों के हस्ताक्षर नहीं होते हैं, उसकी मान्यता नहीं होती है. अगर वसीयत करने वाले ने सिर्फ एक रफ नोट पर अपनी मंशा लिखकर साइन कर दिया और उस पर कम से कम दो गवाहों के हस्ताक्षर भी करा दिए हों तो वह कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य हो जाएगा. गवाहों की गैरमौजूदगी के कारण ऐसी किसी भी वसीयत को वैध नहीं माना जा सकता है और न ही इस पर अमल किया जा सकता है.
वसीयत अमान्य होने पर क्या होगा
अगर वसीयत पर गवाहों के हस्ताक्षर नहीं हैं तो यह माना जाएगा कि संबंधित व्यक्ति की मौत बिना किसी वसीयत के ही हुई है. ऐसी स्थिति में संपत्ति के हकदारों के बीच उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार ही बंटवारा किया जाएगा. ऐसे मामलों में कानूनी वारिसों को उनकी श्रेणी के तहत ही संपत्ति पर अधिकार मिलेगा, जबकि वसीयत होने पर संपत्ति का बंटवारा, वसीयत में रखी गई शर्तों के आधार पर ही किया जाता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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