ये सर्टिफिकेट ये खरीदार को सुरक्षा देता है और फ्रॉड या झगड़े से बचाता है. अगर निल एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट मिल जाए यानी कोई बोझ नहीं होता है. चलिए इसके बारे में आपको सारी डिटेल्स एक-एक करके बताते हैं.
क्या है एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट?
प्रॉपर्टी खरीदते समय अगर बाद में कोई पुराना कर्जदार या कोर्ट का आदेश आ जाए तो आपकी पूरी मेहनत और पैसा डूब सकता है. बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी होम लोन देते समय ये जरूर मांगती हैं ताकि पता चले कि प्रॉपर्टी पहले से किसी और को गिरवी नहीं है. नाम ट्रांसफर करवाने, म्यूनिसिपल रिकॉर्ड में बदलाव, प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड अपडेट या बिल्डिंग परमिशन लेने के लिए एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट का ही अहम रोल होता है.
एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट दो तरह का होता है. एक निल एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट जिसमें लिखा होता है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन, मॉर्टगेज या केस नहीं है. दूसरा डिटेल्ड एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट जिसमें पिछले ट्रांजेक्शन की पूरी डिटेल्स लिखी होती हैं जैसे पहले कोई लोन लिया था या कोई रजिस्टर्ड डील हुई थी. ज्यादातर लोग निल वाला ही मांगते हैं क्योंकि वो सबसे सुरक्षित होता है.
कैसे एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट के लिए करें अप्लाई?
आप ऑफलाइन या ऑनलाइन दोनों तरीके से कर सकते हैं. ऑफलाइन में उस इलाके के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाएं जहां प्रॉपर्टी है. वहां एप्लीकेशन फॉर्म भरकर जमा करें. जो जरूरी डॉक्यूमेंट्स हैं जैसे प्रॉपर्टी का सेल डीड या गिफ्ट डीड की कॉपी, सर्वे नंबर, खाता नंबर, गांव या शहर का नाम, आपका आईडी और एड्रेस प्रूफ इन्हें सबमिट करें. फीस अलग-अलग राज्य में 200 से 600 रुपये तक होती है. अप्लाई करने के बाद 7 से 15 दिन में सर्टिफिकेट मिल जाता है.
ऑनलाइन तरीका कई राज्यों में आसान है. राज्य के रजिस्ट्रेशन या रेवेन्यू डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर जाएं. वहां रजिस्टर करें, प्रॉपर्टी डिटेल्स डालें, डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें और फीस ऑनलाइन पे कर दें. स्टेटस चेक भी ऑनलाइन कर सकते हैं. कुछ राज्यों में अलग-अलग पोर्टल हैं, लेकिन ज्यादातर जगहों पर सरकारी साइट से काम हो जाता है.
कितने साल का लें ये सर्टिफिकेट?
कम से कम 13 साल का तो जरूर लें लेकिन ज्यादा सुरक्षित रहने के लिए 30 साल तक का लेना बेहतर है. इससे पुरानी कोई समस्या छिपी न रह जाए. प्रॉपर्टी डील में ये कागज न देखना बड़ा रिस्क है. कई बार लोग जल्दबाजी में छोड़ देते हैं और बाद में पछताते हैं. इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने से पहले ये जरूर चेक कर लें. ये छोटा सा कागज आपकी बड़ी परेशानी बचा सकता है और ट्रांजेक्शन को पूरी तरह सुरक्षित बना देता है. अगर आप प्रॉपर्टी से जुड़ा कोई काम कर रहे हैं तो एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट को कभी नजरअंदाज न करें.
जानें एक्सपर्ट ने क्या बताया
आरपीएस ग्रुप के डायरेक्टर अमन गुप्ता के अनुसार, एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) प्रॉपर्टी का सबसे जरूरी दस्तावेज है, जो यह तय करता है कि उस संपत्ति का मालिकाना हक साफ और बेचने योग्य है या नहीं. यह सिर्फ एक औपचारिक कागज नहीं है, बल्कि यह जांचने का अहम जरिया है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन, मॉर्गेज, बकाया या कानूनी जिम्मेदारी तो नहीं है.
डेवलपर, निवेशक या खरीदार के लिए EC के जरिए की गई जांच भविष्य में टाइटल, फाइनेंस या रीसेल से जुड़ी परेशानियों से बचाती है. रियल एस्टेट सेक्टर में जहां कानूनी साफ-सफाई से ही संपत्ति की कीमत तय होती है, वहां EC पारदर्शिता और भरोसे को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाता है.
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