आज ज्यादातर बैंक स्टेटमेंट ऑनलाइन आते हैं, निवेश ऐप के जरिए चलते हैं, टैक्स से जुड़े दस्तावेज ईमेल में होते हैं और बीमा पॉलिसी पीडीएफ में सेव रहती है. ऐसे में अगर किसी आदमी का अचानक निधन हो जाए, तो परिवार कानूनी तौर पर सब कुछ पाने का हकदार होते हुए भी अकाउंट्स तक पहुंच नहीं बना पाता. यहीं पर पारंपरिक वसीयत की व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है.
वसीयत बताती है ‘किसे क्या मिलेगा’, लेकिन ‘कैसे मिलेगा’ नहीं
वसीयत यह तय करती है कि किसे कौन-सी संपत्ति मिलेगी. लेकिन यह नहीं बताती कि आपके जीवनसाथी को ईमेल में लॉगिन कैसे करना है या बच्चे को निवेश अकाउंट कैसे एक्सेस करना है. बैंक और वित्तीय संस्थाएं गोपनीयता नियमों के कारण तुरंत जानकारी नहीं देतीं. कई बार परिवार को महीनों तक कागजी प्रक्रिया में उलझना पड़ता है. इस बीच बिल, लोन की EMI और दूसरी देनदारियां चलती रहती हैं. कई परिवार पासवर्ड अनुमान लगाने, हेल्पलाइन पर कॉल करने या देर से किसी छिपे अकाउंट का पता चलने जैसी परेशानी झेलते हैं.
सही डिजिटल प्लानिंग क्या है?
इसका मतलब यह नहीं कि पासवर्ड डायरी में लिख दें या किसी को मैसेज कर दें. बेहतर तरीका है एक सुरक्षित डिजिटल वॉल्ट या पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करना. जरूरी अकाउंट्स की सूची बनाएं और तय करें कि जरूरत पड़ने पर किसे एक्सेस मिलेगा. कुछ लोग डिजिटल एग्जीक्यूटर भी नियुक्त करते हैं यानी ऐसा भरोसेमंद व्यक्ति जो ऑनलाइन अकाउंट्स संभाल सके.
पैसे से आगे भी है मामला
सिर्फ पैसे ही नहीं, फोटो, वीडियो, मैसेज और यादें भी आज डिजिटल डिवाइस और क्लाउड में सेव होती हैं. अगर इनका एक्सेस न मिले, तो परिवार के लिए यह भावनात्मक नुकसान भी हो सकता है.
कड़वी सच्चाई
बेहतरीन तरीके से लिखी गई वसीयत भी आपके ईमेल में लॉगिन नहीं कर सकती, फोन अनलॉक नहीं कर सकती या टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन रीसेट नहीं कर सकती. अगर पासवर्ड आपके साथ ही चले गए, तो परिवार को स्पष्टता नहीं, उलझन विरासत में मिलेगी. आज के दौर में वसीयत तभी पूरी मानी जाएगी, जब उसमें डिजिटल प्लान भी शामिल हो.
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