यह ट्रेन पश्चिम बंगाल के हावड़ा से असम के गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच चलेगी. लगभग 958 किलोमीटर की इस दूरी को यह ट्रेन मात्र 14 घंटे में तय कर लेगी. 18 जनवरी से इस ट्रेन की नियमित सेवा शुरू हो जाएगी, जिससे पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी को एक नई धार मिलेगी.
180 kmph होगी अधिकतम स्पीड
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की अधिकतम डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा (kmph) है, हालांकि नियमित परिचालन के दौरान इसे 130 kmph की औसत गति पर चलाया जाएगा. इस उच्च गति की वजह से यात्री अपने गंतव्य पर अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में कम से कम 3 घंटे पहले पहुंच सकेंगे. इसका बाहरी हिस्सा ‘एरोडायनामिक’ डिजाइन का है, जो हवा के अवरोध को कम करता है और ट्रेन को तेज गति से दौड़ने में मदद करता है.
वंदे भारत स्लीपर किराया
इस सेमी-हाई स्पीड ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 16 कोच लगाए गए हैं. इसकी कुल क्षमता 1128 यात्रियों की है.
- एसी-3 टियर: 11 कोच (किराया लगभग ₹2,300)
- एसी-2 टियर: 4 कोच (किराया लगभग ₹3,000)
- फर्स्ट एसी: 1 कोच (किराया लगभग ₹3,600)
वंदे भारत स्लीपर का किराया राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों से थोड़ा अधिक रखा गया है. रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इसका न्यूनतम किराया 400 किलोमीटर की दूरी के आधार पर तय किया गया है. यह प्रीमियम किराया यात्रियों को मिलने वाली विश्वस्तरीय सुविधाओं और कम यात्रा समय को देखते हुए निर्धारित किया गया है.
‘कवच’ और एंटी-कोलिजन सिस्टम
यात्रियों की सुरक्षा भारतीय रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है. वंदे भारत स्लीपर में स्वदेशी रूप से विकसित ‘कवच’ (Kavach) ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है. यह तकनीक दो ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर को रोकने में सक्षम है. इसके अलावा, ट्रेन में इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट दी गई है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में यात्री सीधे ट्रेन ड्राइवर या गार्ड से बात कर सकेंगे. ड्राइवर के केबिन को भी पूरी तरह से डिजिटल और एडवांस कंट्रोल पैनल से लैस किया गया है, ताकि ट्रेन के संचालन में मानवीय त्रुटि की गुंजाइश न रहे.
यूवीसी और बेहतर सैनिटेशन
स्वास्थ्य और स्वच्छता के मामले में यह ट्रेन हवाई जहाज से भी बेहतर अनुभव प्रदान करेगी. इसमें अत्याधुनिक ‘यूवीसी (UVC) डिसइंफेक्टेंट टेक्नोलॉजी’ का इस्तेमाल किया गया है. यह तकनीक कोच के भीतर बहने वाली हवा को बैक्टीरिया और वायरस से मुक्त रखेगी. कोच में लगा उपकरण हवा को अंदर खींचेगा, उसे यूवी किरणों से फिल्टर करके फ्रेश करेगा और फिर दोबारा कोच में छोड़ेगा. इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यदि आपके बगल वाले यात्री को सर्दी-जुकाम या कोई संक्रामक बीमारी है, तो आपको संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा. यह तकनीक भारतीय रेलवे में स्वच्छता के मानकों को एक नए स्तर पर ले जाएगी.
इंटीरियर में भारतीय संस्कृति की झलक
वंदे भारत स्लीपर का इंटीरियर भारतीय संस्कृति और आधुनिक कला का एक अनूठा संगम है. कोचों के अंदर की सजावट और रंग-संयोजन को बहुत बारीकी से डिजाइन किया गया है. यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए ‘एर्गोनोमिक’ बर्थ (बिस्तर) तैयार किए गए हैं, जिनमें बेहतर कुशनिंग का उपयोग किया गया है. इसके अलावा, ट्रेन में ‘शोर कम करने वाली तकनीक’ (Noise Reduction Technology) का उपयोग किया गया है, जिससे हाई-स्पीड पर चलते समय भी कोच के अंदर यात्रियों को शांति का अनुभव होगा.
नो वेटिंग, नो आरएसी
इस ट्रेन की एक और बड़ी खासियत इसकी सरल और पारदर्शी टिकट बुकिंग प्रणाली है. वंदे भारत स्लीपर में यात्रा करने के लिए यात्रियों को ‘वेटिंग लिस्ट’ या ‘आरएसी (RAC)’ के झंझट से नहीं जूझना पड़ेगा. इसमें केवल पूर्णतः कन्फर्म टिकट ही जारी किए जाएंगे. इससे चार्ट बनने तक की अनिश्चितता खत्म हो जाएगी. साथ ही, ट्रेन में ‘नो वीआईपी कोटा’ पॉलिसी लागू रहेगी. यानी इसमें रेल अधिकारियों या किसी अन्य प्रभावशाली व्यक्ति के लिए कोई विशेष इमरजेंसी कोटा नहीं होगा.
खास होगा भोजन
वंदे भारत स्लीपर में यात्रियों को मिलने वाला भोजन भी खास होगा. रेलवे ने निर्णय लिया है कि जिस क्षेत्र से ट्रेन शुरू होगी, वहां के क्षेत्रीय स्वाद को मेन्यू में प्राथमिकता दी जाएगी. इसके अलावा, प्रत्येक यात्री को 1 लीटर ‘रेल नीर’ की बोतल और एक समाचार पत्र निशुल्क प्रदान किया जाएगा. यात्रियों को हाई-क्वालिटी वाले सॉफ्ट कंबल कवर और एडवांस्ड बेडरोल दिए जाएंगे, जो यात्रा के दौरान होटल जैसा अनुभव प्रदान करेंगे. ट्रेन का सारा स्टाफ निर्धारित और आकर्षक यूनिफॉर्म में यात्रियों की सेवा के लिए तैनात रहेगा.
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