Sebi Mutual Fund Rule Changes- नए नियमों के अनुसार, यदि फंड मैनेजर आपके निवेश पर शानदार रिटर्न देता है तो वह अधिक मैनेजमेंट फीस लेने का हकदार होगा. इसके विपरीत यदि फंड का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले खराब रहता है तो फंड हाउस को अपनी फीस में कटौती करनी होगी.
सेबी ने निवेश के क्षेत्र में जवाबदेही तय करने के लिए ‘बेस एक्सपेंस रेश्यो’ का एक बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट पेश किया है. अब तक म्यूचुअल फंड कंपनियां एक निश्चित मैनेजमेंट फीस वसूलती थीं, चाहे फंड का प्रदर्शन कैसा भी हो. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. 1 अप्रैल 2026 से फंड हाउस अपने प्रदर्शन (परफॉर्मेंस) के आधार पर ही फीस तय कर सकेंगे.
जैसा रिटर्न, वैसी फीस
नए नियमों के अनुसार, यदि फंड मैनेजर आपके निवेश पर शानदार रिटर्न देता है तो वह अधिक मैनेजमेंट फीस लेने का हकदार होगा. इसके विपरीत यदि फंड का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले खराब रहता है तो फंड हाउस को अपनी फीस में कटौती करनी होगी. इससे फंड मैनेजरों पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव बढ़ेगा और निवेशकों को अधिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाएगी.
ब्रोकरेज कैप में कटौती से घटेगी ट्रेडिंग लागत
निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए सेबी ने ब्रोकरेज और अन्य खर्चों की ऊपरी सीमा (Cap) को काफी नीचे ला दिया है. ट्रेडिंग की लागत घटने से निवेशकों के पोर्टफोलियो की नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर सकारात्मक असर पड़ेगा. इक्विटी सेगमेंट में ब्रोकरेज कैप 0.085% से 0.06% कर दिया गया है. डेट सेगमेंट में यह सीमा 0.0389% से घटाकर 0.02% कर दी गई है. इससे खासतौर पर उन फंड्स को राहत मिलेगी जिनके पोर्टफोलियो में ज्यादा खरीद-बिक्री होती है. ब्रोकरेज शुल्क में 30% से 49% तक की यह बड़ी कटौती उन फंड्स के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी जिनमें शेयरों की खरीद-बिक्री बहुत अधिक फ्रीक्वेंसी पर होती है.
टैक्स का हिसाब होगा अलग
अक्सर निवेशकों को यह समझ नहीं आता था कि उनके निवेश से काटा गया पैसा वास्तव में कहां जा रहा है. सेबी ने अब पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं. अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), स्टांप ड्यूटी और एग्जिट लोड जैसे शुल्कों को अलग से दिखाना अनिवार्य होगा. निवेशकों को अब स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि उनके फंड में से कितना पैसा टैक्स में गया, कितना ब्रोकरेज में और कितना वास्तव में निवेश हुआ.
लापरवाही की अब कोई जगह नहीं
सेबी का मुख्य ध्यान सिर्फ मुनाफे पर ही नहीं, बल्कि फंड हाउस के प्रबंधन और गवर्नेंस पर भी है. नए नियमों के तहत एएमसी के अधिकारियों और ट्रस्टीज की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की गई है. यदि फंड प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है या निवेशकों के हितों के साथ खिलवाड़ होता है, तो सेबी कड़ी कार्रवाई करेगा. निवेशकों की सुरक्षा को अब फंड हाउस की पहली प्राथमिकता बना दिया गया है.
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