Bullet Train: जापान ने अपनी पहली बिना सीट और बिना खिड़की वाली खास बुलेट ट्रेन लॉन्च की है, जिसे केवल टेस्टिंग के लिए तैयार किया गया है. यह ट्रेन मैग्लेव (Maglev) टेक्नोलॉजी पर चलती है, जो मैग्नेटिक लेविटेशन यानी चुंबकीय शक्ति के जरिए पटरी से थोड़ा ऊपर उठकर दौड़ती है. इसकी अधिकतम रफ्तार 600 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. सेंट्रल जापान रेलवे कंपनी ने इसे चूबू क्षेत्र में स्पीड और टेक्नोलॉजी टेस्ट करने के लिए तैयार किया है. इस ट्रेन में न तो सीटें हैं और न ही खिड़कियां हैं लेकिन ऐसा क्यों है, ये आपको बताते हैं.
जापान ने अपनी पहली बिना सीट वाली और बिना खिड़की वाली बुलेट ट्रेन लॉन्च कर दी है. ये ट्रेन दुनिया में अपनी तरह की सबसे अनोखी है और इसे स्पेशल टेस्टिंग के लिए बनाया गया है. ये ट्रेन मैग्लेव टेक्नोलॉजी पर चलती है जो मैग्नेटिक लेविटेशन से काम करती है. ट्रेन की स्पीड 600 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. जापान की सेंट्रल जापान रेलवे कंपनी ने इस ट्रेन को चूबू क्षेत्र में टेस्टिंग के लिए तैयार किया है. इस ट्रेन में न तो सीटें हैं और न ही खिड़कियां क्योंकि ये सिर्फ स्पीड और टेक्नोलॉजी टेस्ट करने के लिए है.

इस ट्रेन का नाम Shinkansen है. इसमें कुल 24 डिब्बे हैं लेकिन कोई पैसेंजर सीट नहीं लगाई गई है. इंजीनियर्स और टेस्टिंग टीम के लोग ही इसमें बैठते हैं. ट्रेन के अंदर सिर्फ मॉनिटर, सेंसर और टेस्टिंग इक्विपमेंट रखे गए हैं. बिना खिड़की होने की वजह से ट्रेन का वजन कम होता है और हवा का रेसिस्टेंस भी कम होता है. इससे ट्रेन और तेज चल सकती है. कंपनी का कहना है कि ये डिजाइन स्पीड बढ़ाने और एनर्जी बचाने के लिए बनाया गया है.

ट्रेन को 2027 में टोक्यो से नागोया के बीच चलाने की योजना है. ये रूट 286 किलोमीटर लंबा होगा और सिर्फ 40 मिनट में पूरा हो जाएगा. अभी तक टोक्यो से नागोया जाने में शिनकान्सेन से 1 घंटा 40 मिनट लगते हैं. मैग्लेव ट्रेन से समय आधा से भी कम हो जाएगा. ये ट्रेन मैग्नेटिक फील्ड से जमीन से ऊपर 10 सेंटीमीटर तक उठकर चलती है. इससे फ्रिक्शन बिल्कुल नहीं होता और स्पीड बहुत ज्यादा मिलती है.
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इस ट्रेन की सबसे खास बात ये है कि इसमें कोई खिड़की नहीं है. कंपनी ने कहा कि टेस्टिंग के दौरान खिड़कियां जरूरी नहीं क्योंकि इंजीनियर्स बाहर की बजाय अंदर के डेटा पर फोकस करते हैं. बाद में पैसेंजर वर्जन में खिड़कियां लगाई जाएंगी. अभी ये ट्रेन सिर्फ टेस्ट ट्रैक पर चल रही है. जापान ने 2015 में भी मैग्लेव को 603 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पर चलाकर रिकॉर्ड बनाया था.

ये प्रोजेक्ट बहुत महंगा है. पूरा रूट बनाने में करीब 9 ट्रिलियन येन यानी लाखों करोड़ रुपये लगेंगे. जापान सरकार और कंपनी मिलकर इसे फंड कर रही है. कंपनी का कहना है कि ये ट्रेन भविष्य की हाई-स्पीड ट्रैवल का नया दौर शुरू करेगी. अमेरिका और चीन भी मैग्लेव ट्रेन पर काम कर रहे हैं लेकिन जापान अभी सबसे आगे है.

ट्रेन के अंदर कोई सीट न होने से टेस्टिंग आसान हो जाती है. इंजीनियर्स अलग-अलग स्पीड पर ट्रेन के व्यवहार को चेक करते हैं. वाइब्रेशन, मैग्नेटिक फील्ड और सेफ्टी सिस्टम पर फोकस रहता है. कंपनी ने कहा कि 2027 में जब पैसेंजर सर्विस शुरू होगी तो ट्रेन में आरामदायक सीटें, खिड़कियां और लग्जरी सुविधाएं होंगी. अभी ये सिर्फ टेक्नोलॉजी का प्रोटोटाइप है.

जापान की शिनकान्सेन ट्रेनें पहले से ही दुनिया में सबसे तेज मानी जाती हैं. अब मैग्लेव से वो और आगे निकल जाएंगी. ये ट्रेन पर्यावरण के लिए भी बेहतर है क्योंकि इसमें बिजली से चलती है और कम एनर्जी यूज करती है. जापान का लक्ष्य है कि 2037 तक ओसाका तक ये रूट बढ़ाया जाए.

जापान ने बिना सीट और बिना खिड़की वाली बुलेट ट्रेन लॉन्च करके नया रिकॉर्ड बनाया है. ये ट्रेन स्पीड और इनोवेशन का कमाल दिखाती है. भारतीयों के लिए ये खबर इंस्पायरिंग है क्योंकि हमारी देश में भी हाई-स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट चल रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही ऐसी एडवांस ट्रेनें भारत में भी आएंगी.
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