जरूरी सवाल यह है कि इसका असर आम निवेशकों पर क्या पड़ेगा. पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड एसआईपी, पेंशन फंड और बीमा कंपनियों के निवेश से घरेलू पैसा शेयर बाजार की रीढ़ बन गया है, जिससे बाजार की दिशा अब सिर्फ विदेशी निवेशकों के फैसलों पर निर्भर नहीं रही है.
आम निवेशकों के लिए बाजार अब ज्यादा सुरक्षित क्यों
घरेलू निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बाजार की गिरावट का असर अब पहले जितना खतरनाक नहीं रह गया है. पहले जब एफआईआई बड़े पैमाने पर बिकवाली करते थे, तो निफ्टी और सेंसेक्स में भारी गिरावट देखी जाती थी. अब डीआईआई और म्यूचुअल फंड जैसे लंबे समय के निवेशक गिरावट में भी खरीदारी करते हैं, जिससे बाजार को सहारा मिलता है और आम निवेशकों की पूंजी को बड़ा झटका नहीं लगता.
एसआईपी और पेंशन फंड ने आम आदमी को बनाया बाजार की ताकत
घरेलू निवेशकों की ताकत की असली वजह आम लोगों का पैसा है. म्यूचुअल फंड एसआईपी, ईपीएफओ, एनपीएस और बीमा पॉलिसी जैसे निवेश माध्यमों के जरिए आम निवेशकों का पैसा शेयर बाजार में आ रहा है. 2025 में रिकॉर्ड 3.34 लाख करोड़ रुपये का एसआईपी निवेश हुआ, जिसने बाजार को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाई. इसका मतलब यह है कि अब आम निवेशक सिर्फ बाजार को फॉलो नहीं कर रहा, बल्कि बाजार को चला रहा है.
विदेशी बिकवाली का असर अब कम क्यों होगा
विशेषज्ञों के मुताबिक रुपये की कमजोरी, वैश्विक अनिश्चितता और दूसरे देशों में बेहतर रिटर्न के मौके मिलने से विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं. लेकिन घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने पिछले पांच साल में निफ्टी को करीब 72 से 75 प्रतिशत का रिटर्न देने में मदद की है. इससे संकेत मिलता है कि विदेशी पैसा निकलने पर भी बाजार पूरी तरह टूटने वाला नहीं है, जो आम निवेशकों के लिए बड़ा पॉजिटिव फैक्टर है.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं आम निवेशकों के लिए
आनंद राठी ग्लोबल फाइनेंस के नवीन व्यास (Naveen Vyas) के मुताबिक यह बदलाव सिर्फ साइक्लिकल नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल है, यानी लंबे समय तक रहने वाला है. ओम्नी साइंस कैपिटल के अश्विनी शामी (Ashwini Shami) का कहना है कि घरेलू निवेश लंबे समय तक टिकाऊ रह सकता है, क्योंकि यह एसआईपी और पेंशन फंड जैसे स्थायी स्रोतों से आता है.
आम निवेशक को क्या सीख लेनी चाहिए
इस बदलाव का मतलब यह है कि भारतीय शेयर बाजार अब विदेशी निवेशकों के भरोसे नहीं है. घरेलू पैसा बाजार को स्थिर बना रहा है, जिससे आम निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म निवेश करना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है. हालांकि, बाजार में उतार चढ़ाव रहेगा, लेकिन बड़ी गिरावट का जोखिम पहले के मुकाबले कुछ हद तक कम हो गया है. यह संकेत देता है कि भारत में शेयर बाजार अब आम निवेशकों की ताकत से चल रहा है, न कि सिर्फ विदेशी पैसों से.
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