मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के अनुसार, एफआईआई की होल्डिंग पिछले आठ तिमाहियों के सबसे निचले स्तर पर आ गई है. डीआईआई पहले ही कुल इक्विटी बाजार में आगे निकल चुके थे, लेकिन निफ्टी-50 इंडेक्स में पहली बार उन्होंने विदेशी दिग्गजों को पीछे छोड़ा है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई अल्पकालिक बदलाव नहीं बल्कि एक गहरा संरचनात्मक सुधार (Structural Shift) है. इसके पीछे मुख्य रूप से भारतीय खुदरा निवेशकों का शेयर बाजार पर अटूट भरोसा है.
3.34 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड एसआईपी
कैलेंडर वर्ष 2025 में एसआईपी के माध्यम से भारतीय खुदरा निवेशकों ने 3.34 लाख करोड़ रुपये बाजार में लगाए. ईपीएफओ (EPFO), पेंशन फंड्स और बीमा कंपनियों की इक्विटी में बढ़ती भागीदारी ने बाजार को एक स्थायी लिक्विडिटी प्रदान की है. भारत में नई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की शुरुआत ने घरेलू निवेश के इकोसिस्टम को और अधिक प्रतिस्पर्धी और गहरा बनाया है.
FII बेच रहे हैं भारतीय शेयर
पिछले पांच वर्षों में जब भी वैश्विक अनिश्चितताओं या बढ़ती अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की, भारतीय बाजार पहले की तरह धराशायी नहीं हुआ. आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में एफआईआई ने लगभग 9.96 लाख करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है. इसके बावजूद डीआईआई के समर्थन के चलते निफ्टी ने इसी अवधि में 72 से 75 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया. यह दर्शाता है कि भारतीय बाजार अब केवल विदेशी फंड्स के भरोसे नहीं टिका है. कमजोर रुपया और अन्य उभरते बाजारों में बेहतर अवसरों के चलते एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है, लेकिन घरेलू फंड्स ने उस खाली जगह को मजबूती से भर दिया है.
निवेश के रुख में स्पष्ट अंतर
तिमाही आधार पर निवेश के रुझान में एक बड़ा अंतर देखने को मिला. जहां एफआईआई ने निफ्टी-50 की लगभग 78 फीसदी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की, वहीं डीआईआई ने इसके विपरीत इंडेक्स की 82 फीसदी कंपनियों में अपनी होल्डिंग बढ़ाई है. मूल्य के आधार पर देखें तो डीआईआई की ‘एसेट्स अंडर कस्टडी’ लगभग 24.8 अरब डॉलर रही, जो एफआईआई की 24.3 अरब डॉलर की होल्डिंग से अधिक है.
किन शेयरों में डीआईआई ने लगाया दांव?
डीआईआई की हिस्सेदारी कुछ चुनिंदा शेयरों में सालाना आधार पर 4 फीसदी से भी अधिक बढ़ी है. इनमें डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज, मैक्स हेल्थकेयर, एशियन पेंट्स, बजाज ऑटो, टाटा कंज्यूमर, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, टेक महिंद्रा, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और श्रीराम फाइनेंस शामिल हैं.
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