केवल फरवरी महीने की बात करें तो आईबीएम शेयर अब तक 26.8% तक टूट चुके हैं, जो साल 1992 के बाद कंपनी के इतिहास का सबसे बुरा महीना साबित होने की ओर अग्रसर है. सोमवार को एसएंडपी 500 इंडेक्स में आईबीएम सबसे पिछड़ने वाला शेयर रहा.
एंथ्रोपिक ने हिला दी आईबीएम की नींव
आईबीएम के शेयर में भारी गिरावट के पीछे कोई खराब तिमाही नतीजे नहीं, बल्कि एआई स्टार्टअप ‘एंथ्रोपिक’ की एक घोषणा है. एंथ्रोपिक ने दावा किया है कि उसका नया टूल ‘क्लॉड कोड’ पुरानी प्रोग्रामिंग भाषा कॉमन बिजनेस-ओरिएंटेड लैंग्वेज पर चलने वाले सिस्टम को आसानी से आधुनिक बना सकता है. अब आप सोचेंगे कि एक पुरानी भाषा के अपडेट होने से आईबीएम को क्या फर्क पड़ता है?
दरअसल, कोबोल ही वह ‘सोने का अंडा’ देने वाली मुर्गी है, जिसके दम पर आईबीएम दशकों से अरबों डॉलर कमा रही है. 1960 के दशक की यह भाषा आज भी दुनिया के वित्तीय ढांचे की रीढ़ है. एक आंकड़े के मुताबिक, अमेरिका के 95% एटीएम ट्रांजैक्शन आज भी कोबोल पर आधारित मेनफ्रेम सिस्टम पर चलते हैं, जिन्हें आईबीएम बेचती और मेंटेन करती है.
क्यों खतरे में है आईबीएम
अब तक कोबोल को आधुनिक बनाना या उसे दूसरी भाषा में बदलना एक बेहद जटिल, खर्चीला और जोखिम भरा काम माना जाता था. इसी जटिलता ने आईबीएम के लिए एक ‘बिजनेस मोट’ यानी सुरक्षा कवच का काम किया. यानी कंपनियां चाहकर भी आईबीएम के सिस्टम को छोड़ नहीं पाती थीं क्योंकि उसे बदलने की लागत उसे चलाने से कहीं ज्यादा थी.
लेकिन एंथ्रोपिक ने इस समीकरण को पलट दिया है. कंपनी का कहना है कि एआई अब हजारों लाइनों के कोड को मैप कर सकता है, वर्कफ्लो को डॉक्यूमेंट कर सकता है और उन जोखिमों को चंद मिनटों में पहचान सकता है जिन्हें खोजने में इंसानी विशेषज्ञों को महीनों लग जाते थे. सीधे शब्दों में कहें तो, जिस काम को करने में सालों लगते थे, एआई उसे कुछ हफ्तों में और बहुत कम खर्च में कर देगा. इससे आईबीएम के मेनफ्रेम बिजनेस मॉडल पर अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है.
टेक्निकल डेट और एआई का प्रहार
एंथ्रोपिक का यह कदम उन कंपनियों के लिए वरदान है जो ‘टेक्निकल डेट’ (पुरानी तकनीक के रखरखाव का बोझ) से दबी हुई हैं. अक्सर कंपनियां सॉफ्टवेयर विकास में शॉर्टकट लेती हैं, जिससे भविष्य में मेंटेनेंस का खर्च बढ़ जाता है. एआई अब इस ‘तकनीकी कर्ज’ को खत्म करने का हथियार बन रहा है. एंथ्रोपिक का लक्ष्य लेगेसी कोड सिस्टम और कंपनियों के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह से बदलना है, जो आईबीएम जैसी पारंपरिक कंपनियों के लिए सीधा खतरा है.
साइबर सुरक्षा क्षेत्र में भी खलबली
एआई का यह खौफ सिर्फ आईबीएम तक सीमित नहीं है. कई साइबर सुरक्षा कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखी गई थी. इसका कारण भी एंथ्रोपिक ही था, जिसने ‘क्लॉड कोड सिक्योरिटी’ फीचर लॉन्च किया. यह टूल सॉफ्टवेयर की कमजोरियों और कोडबेस में सुरक्षा खामियों को खुद स्कैन कर सकता है. बाजार में फिलहाल “पहले बेचो, बाद में सवाल पूछो” की स्थिति बनी हुई है, जहां निवेशक एआई से प्रभावित होने वाले किसी भी पारंपरिक सेक्टर से अपना पैसा निकाल रहे हैं.
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