आईटी शेयरों में लगातार दूसरे दिन भारी दबाव देखने को मिला है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते दखल और एंथ्रोपिक (Anthropic) के नए एआई टूल लॉन्च होने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई है. जेफरीज (Jefferies) ने साफ चेतावनी दी है कि आईटी सेक्टर के लिए मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं और आगे भी दबाव बना रह सकता है. निफ्टी आईटी इंडेक्स दो सत्रों में करीब 7 फीसदी टूट चुका है और दिग्गज आईटी शेयरों में बिकवाली जारी है. ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि एआई एप्लिकेशन सर्विसेज से होने वाली कमाई पर असर डाल सकता है. ऐसे में निकट भविष्य में आईटी शेयरों में उतार चढ़ाव बना रह सकता है.
बाजार में दबाव का असर दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों पर साफ दिखा. बुधवार को जिन शेयरों में 8 फीसदी तक की गिरावट आई थी, वे गुरुवार को भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए. एमफेसिस (Mphasis) के शेयर करीब 2 फीसदी टूटे, जबकि इन्फोसिस (Infosys) और एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट रही. कोफोर्ज (Coforge) और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स (Persistent Systems) के शेयरों में भी करीब 1 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली. वहीं विप्रो (Wipro), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra), एलटीआईमाइंडट्री (LTIMindtree) और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस (TCS) भी मामूली गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे.
एंथ्रोपिक बना काल
आईटी शेयरों में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई आशंकाएं मानी जा रही हैं. दरअसल एआई डेवलपर एंथ्रोपिक (Anthropic) ने अपने क्लॉड एआई चैटबॉट के लिए एक नया लीगल टूल लॉन्च किया है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है. कंपनी ने पिछले हफ्ते क्लॉड कोवर्क एजेंट के लिए ऐसे प्लग इन पेश किए हैं, जो लीगल, सेल्स, मार्केटिंग और डेटा एनालिसिस जैसे कामों को ऑटोमेट कर सकते हैं.
ब्रोकरेज की चेतावनी
इस कदम के बाद यह चिंता गहराने लगी है कि एआई पारंपरिक आईटी सर्विस और सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. ट्रेडर्स और एनालिस्ट्स का मानना है कि जिन सेक्टर्स को अब तक एआई का सबसे बड़ा फायदा उठाने वाला माना जा रहा था, वही सेक्टर अब सबसे ज्यादा दबाव में आ सकते हैं. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए कहा है कि आईटी सेक्टर के लिए आगे और दर्द बाकी है. जेफरीज के मुताबिक एंथ्रोपिक के कोवर्क प्लग इन यह दिखाते हैं कि एआई कैसे एप्लिकेशन सर्विसेज से होने वाली कमाई को नुकसान पहुंचा सकता है. यह सेगमेंट आईटी कंपनियों के कुल रेवेन्यू का करीब 40 से 70 फीसदी हिस्सा होता है. जेफरीज ने कहा कि अगले एक से दो साल में आईटी कंपनियों की ग्रोथ पर दबाव बना रह सकता है. पुरानी सर्विस लाइनों में डिफ्लेशन का असर, उभरते एआई अवसरों से मिलने वाले फायदे पर भारी पड़ सकता है. इसका सीधा असर रेवेन्यू ग्रोथ पर दिख सकता है.
अन्य ब्रोकरेज ने चेताया
मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) के एनालिस्ट टोनी कैपलन (Toni Kaplan) समेत अन्य विशेषज्ञों ने भी इसे बढ़ती प्रतिस्पर्धा का संकेत बताया है. उनका मानना है कि एआई के नए फीचर्स सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए संभावित रूप से नेगेटिव साबित हो सकते हैं. बी राइली वेल्थ (B. Riley Wealth) के चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट आर्ट होगन (Art Hogan) ने कहा कि जैसे जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आगे बढ़ेगा, वैसे वैसे कई सॉफ्टवेयर कंपनियां डिसरप्शन की चपेट में आ सकती हैं. यही वजह है कि पूरे टेक सेक्टर में दबाव देखने को मिल रहा है. रेलिगेयर ब्रोकिंग (Religare Broking) के रिसर्च हेड अजित मिश्रा (Ajit Mishra) के मुताबिक एंथ्रोपिक के एडवांस एआई टूल्स ने निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जेनरेटिव एआई भविष्य में आउटसोर्सिंग और सॉफ्टवेयर से जुड़े कई काम खुद कर सकता है. इससे निफ्टी आईटी समेत ग्लोबल टेक स्टॉक्स में चौतरफा बिकवाली देखने को मिल रही है.
हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि आईटी सेक्टर के फंडामेंटल अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुए हैं. लेकिन निकट भविष्य में सेंटिमेंट अस्थिर बना रह सकता है. निवेशकों को फिलहाल आक्रामक पोजिशन लेने से बचने और बाजार में स्थिरता के साफ संकेतों का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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