कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अपने 17वें बजट में राज्य की एक्साइज व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है. अप्रैल 2026 से नया एक्साइज बिल लागू होगा, जिसमें पुरानी टैक्स प्रणाली की जगह अल्कोहल-इन-बेवरेज (AIB) आधारित टैक्सेशन सिस्टम लागू किया जाएगा. इसमें टैक्स शराब में मौजूद अल्कोहल की मात्रा के आधार पर लगेगा और सरकार कीमतें तय नहीं करेगी. इस खबर के आते ही शेयर बाजार में कुछ अल्कोहल रिफाइनरी स्टॉक्स में तेजी देखने को मिली है.
बजट में एक्साइज सुधार के तहत अब सरकार शराब की कीमतें खुद तय नहीं करेगी यानी डीरगुलेशन होगा. टैक्स सिर्फ अल्कोहल की स्ट्रेंथ पर आधारित होगा. इससे शराब इंडस्ट्री को फायदा मिलने की उम्मीद है क्योंकि सिस्टम ज्यादा ट्रांसपरेंसी और ग्लोबल स्टैंडर्ड वाला बनेगा. राज्य का लक्ष्य 2026-27 में एक्साइज से 45000 करोड़ रुपये की कमाई करना है. नई व्यवस्था में टैक्सेशन और कंप्लायंस पर ज्यादा ध्यान रहेगा जबकि सोशल कॉस्ट जैसे स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे हेल्थ डिपार्टमेंट देखेगा.
शराब कंपनियों के शेयरों में तेजी
सरकार की नई पॉलिसी की घोषणा के बाद भारतीय शराब कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली. यूनाइटेड स्पिरिट्स का शेयर करीब 5.4% चढ़ गया, जबकि यूनाइटेड ब्रेवरीज में लगभग 2.6% की बढ़त दर्ज हुई. इसके अलावा तिलकनगर इंडस्ट्रीज और राडिको खेतान जैसे शराब कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली. ब्रोकरेज फर्म्स का कहना है कि यह बदलाव इंडस्ट्री के लिए पॉजिटिव है क्योंकि नया सिस्टम बेहतर कमाई और आसान नियम लाएगा. अन्य कंपनियों जैसे रेडिको खेतान के शेयर भी ऊपर गए. बाजार में यह खबर अच्छी लगी क्योंकि पुरानी व्यवस्था में कई दिक्कतें थीं और नया तरीका ज्यादा निष्पक्ष माना जा रहा है.
कर्नाटक में शराब का कारोबार
सिद्धरमैया ने कहा कि यह सुधार राज्य की एक्साइज पॉलिसी को आधुनिक बनाएगा. दशकों पुरानी सिस्टम को बदलकर नया बिल लाया जाएगा. इससे कमाई बढ़ेगी और भ्रष्टाचार कम होने की उम्मीद है. आपको बता दें कि भारत दुनिया का आठवां सबसे बड़ा शराब का मार्केट है, जहां हर साल करीब 45 अरब डॉलर का कारोबार होता है. यहां शराब से जुड़े नियम और कीमतें हर राज्य में अलग-अलग तय होती हैं. कर्नाटक में शराब की खुदरा कीमतें सरकार तय करती है. कंपनियां पहले अपनी एक्स-फैक्ट्री कीमत घोषित करती हैं और उसी आधार पर राज्य सरकार अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) तय करती है. इसके अलावा कर्नाटक में शराब पर टैक्स भी देश के सबसे ज्यादा टैक्स में शामिल है. यहां शराब को कई प्राइस कैटेगरी में बांटा गया है और हर कैटेगरी पर अलग-अलग अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगती है.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.