काबी ने ब्रिटेन के अख़बार फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा कि अगर युद्ध जारी रहता है तो खाड़ी क्षेत्र के लगभग सभी ऊर्जा निर्यातकों को “फोर्स मेज्योर” घोषित करना पड़ सकता है. इसका मतलब होता है कि असाधारण परिस्थितियों के कारण कंपनियां अपने आपूर्ति समझौतों को अस्थायी रूप से रोक देती हैं.
128 में से केवल 6 या 7 जहाज ही उपलब्ध
कतर ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, इस हफ्ते ईरान के ड्रोन हमले के बाद देश के सबसे बड़े एलएनजी संयंत्र रस लफान पर काम प्रभावित हुआ. यह संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी उत्पादन केंद्रों में से एक है.
ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने बताया कि अभी नुकसान की पूरी जांच चल रही है और यह स्पष्ट नहीं है कि मरम्मत में कितना समय लगेगा. उनके अनुसार भले ही अभी युद्ध रुक जाए, लेकिन निर्यात व्यवस्था को सामान्य होने में कई हफ्ते या महीनों का समय लग सकता है.
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में कतर के पास मौजूद 128 एलएनजी जहाज़ों में से केवल 6 या 7 ही ऐसे हैं जो फिलहाल कार्गो लोड करने के लिए उपलब्ध हैं, जबकि बाकी जहाज़ अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं.
2-3 हफ्ते में ही बढ़ जाएगी कीमत
ऊर्जा बाज़ार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है. यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है.
साद अल-काबी का अनुमान है कि यदि जहाज़ों की आवाजाही इस मार्ग से बाधित रहती है तो 2 से 3 हफ्तों के भीतर कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि प्राकृतिक गैस की कीमत 40 डॉलर प्रति MMBtu तक जा सकती है, जो युद्ध से पहले की कीमतों से लगभग चार गुना अधिक होगी.
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद इस क्षेत्र में जहाज़ों की आवाजाही काफी धीमी हो गई है. कई जहाज़ों पर हमले की खबरें सामने आई हैं, बीमा लागत बढ़ गई है और कई शिपिंग कंपनियां इस मार्ग से जहाज़ भेजने से हिचक रही हैं.
कतर की गैस विस्तार योजना पर भी संकट
युद्ध का असर कतर की महत्वाकांक्षी गैस विस्तार परियोजना पर भी पड़ सकता है. कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तरलीकृत प्राकृतिक गैस उत्पादक है और नॉर्थ फील्ड (North Field) गैस क्षेत्र में लगभग 30 अरब डॉलर का विस्तार प्रोजेक्ट चला रहा है.
इस परियोजना का लक्ष्य देश की एलएनजी उत्पादन क्षमता को 77 मिलियन टन सालाना से बढ़ाकर 2027 तक 126 मिलियन टन करना है. हालांकि साद अल-काबी का कहना है कि मौजूदा युद्ध की स्थिति इस योजना की समयसीमा को निश्चित रूप से प्रभावित करेगी.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है गहरा असर
कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. उनका कहना है कि ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल से दुनिया भर की आर्थिक वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है. खाड़ी देशों से केवल तेल और गैस ही नहीं बल्कि पेट्रोकेमिकल्स और उर्वरक उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल भी बड़ी मात्रा में जाता है. ऐसी स्थिति में कई उद्योगों की सप्लाई चेन टूट सकती है और उत्पादन ठप होने का खतरा पैदा हो सकता है.
सुरक्षा कारणों से रोका गया उत्पादन
कतर एनर्जी (QatarEnergy) के सीईओ के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल रहे साद अल-काबी ने बताया कि संभावित हमलों की चेतावनी मिलने के बाद सुरक्षा कारणों से उत्पादन रोकने का फैसला लिया गया.
उन्होंने कहा कि कंपनी ने हमले के बाद केवल 24 घंटों के भीतर लगभग 9,000 कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया. उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक सैन्य अधिकारी यह पुष्टि नहीं करते कि खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है, तब तक उत्पादन दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा.
उनके शब्दों में, जब हमारे कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में हो और सुविधाओं पर हमला हो रहा हो, तब हम काम जारी नहीं रख सकते. लोगों की जान जोखिम में डालना संभव नहीं है.
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