शेयर बाजार में जब भी किसी कंपनी का आईपीओ आता है तो कई निवेशक लिस्टिंग गेन की उम्मीद में जल्दबाजी में पैसा लगा देते हैं. अक्सर लोग सिर्फ ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) देखकर या दूसरों को कमाते देखकर आवेदन कर देते हैं, जिससे बाद में नुकसान भी हो सकता है. इसलिए आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी के बिजनेस, ग्रोथ और फाइनेंशियल स्थिति को समझना जरूरी है. साथ ही निवेशकों को DRHP जरूर देखना चाहिए, जिससे पता चलता है कि जुटाया गया पैसा कंपनी के विकास में जाएगा या पुराने शेयरधारकों के पास.
आईपीओ में पैसा लगाने से पहले कंपनी के पेपर्स और प्रॉफिट का सही एनालिसिस करना बेहद जरूरी है. (एआई फोटो)
निवेश तब होता है जब आप कंपनी के बिजनेस को अच्छे से समझते हैं, उसका विकास देखते हैं और लॉन्ग-टर्म के लिए पैसा लगाते हैं. वहीं, सट्टेबाजी में सिर्फ लिस्टिंग के दिन मुनाफे की उम्मीद में बिना रिसर्च के आवेदन किया जाता है. आईपीओ से जुटाया पैसा कंपनी के पास जाता है या पुराने शेयरधारकों (संस्थापक या वेंचर फंड) को जाता है. अगर इश्यू में ऑफर फॉर सेल (OFS) का हिस्सा ज्यादा है, तो पैसा कंपनी के विकास में नहीं, बल्कि पुराने मालिकों की जेब में जा रहा है. इसलिए DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) जरूर चेक करें, जोकि आसानी से आपको SEBI की वेबसाइट या स्टॉक एक्सचेंज पर मिल जाता है.
DRHP को ढंग से समझें
सबसे पहले DRHP से कंपनी का बिजनेस मॉडल समझें. कंपनी क्या करती है, उसकी इंडस्ट्री में स्थिति क्या है, भविष्य का विजन क्या है? पिछले तीन साल के फाइनेंशियल्स देखें जैसे राजस्व (रेवेन्यू) कितना बढ़ा, प्रॉफिट कैसा है, P/E रेश्यो निकालें और सेक्टर की अन्य कंपनियों से कंप्येर करें. अगर सेक्टर में औसत P/E 40-50 गुना है और आईपीओ 200 गुना पर आ रहा है, तो यह महंगा हो सकता है. नई कंपनियों के लिए P/S (प्राइस टू सेल्स) रेशियो देखें.
कंपनी का मुनाफा और कर्ज जानें
इसके अलावा मार्जिन का भी ध्यान रखें. ग्रॉस मार्जिन 60% से ज्यादा होना अच्छा है. अगर बिक्री बढ़ रही है लेकिन मार्जिन गिर रहा है, तो लागत बढ़ने या कॉम्टिशन का संकेत है. नेट मार्जिन में गिरावट (जैसे 6% से 2%) प्रॉफिटेबिलटी की कमजोरी दिखाती है. ये अहम है कि आप तीन साल के मार्जिन का चार्ट बनाकर ट्रेंड देखें और इसके बाद कर्ज का स्टेट्स चेक करें. इसके लिए बैलेंस शीट से डेट-टू-इक्विटी रेश्यो देखें. 1 से नीचे अच्छा, 2 से ऊपर जोखिम भरा. ब्याज कवरेज अनुपात 2-3 गुना से कम हो तो कंपनी ब्याज चुकाने में मुश्किल महसूस कर रही है. ज्यादा कर्ज और कमजोर मार्जिन वाला आईपीओ से बचें.
प्राइस बैंड की जानकारी
प्राइस बैंड का भी एनालिसिस करें. अगर कंपनी का विकास शानदार नहीं है तो महंगा प्राइस बैंड से दूर रहें. प्रमोटर्स और मैनेजमेंट टीम की विश्वसनीयता भी देखें. विशेषज्ञों के अनुसार, GMP पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. कंपनी के विकास, रेवेन्यू ग्रोथ, प्रॉफिट और जोखिमों पर फोकस करें. अगर बिजनेस समझ नहीं आता तो आवेदन न करें. सही रिसर्च से ही आप अच्छे आईपीओ चुन सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं. बाजार में आईपीओ बहुत हैं, लेकिन समझदारी से चुनने वाले ही असली मुनाफा कमाते हैं.
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