मिंट ने रोहित श्रीवास्तव से बातचीत की, जिसमें इंडिया चार्ट्स के संस्थापक ने चिंताजनक स्थितियों की तरफ इशारा किया. उन्होंने कहा कि ग्लोबल हेडविंड्स यानी अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आ रहे नकारात्मक संकेत भारतीय बाजार पर दबाव बना रहे हैं. अमेरिका समेत कई बड़े बाजारों में तेजी जरूरत से ज्यादा हो चुकी थी और अब वहां गिरावट के संकेत दिखने लगे हैं. उन्होंने बताया कि अमेरिकी सूचकांकों में एक अहम तकनीकी पैटर्न टूटा है, जो आगे कमजोरी का संकेत देता है. इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है.
ट्रेड डील से आया उछाल कितना मजबूत?
अगर मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो निफ्टी 50 ने जनवरी की शुरुआत में 26,373.20 का ऑल टाइम हाई बनाया था. इसके बाद बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा और 6 फरवरी को निफ्टी 25,693.70 पर बंद हुआ, जो अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 2.6 फीसदी नीचे है. हालांकि फरवरी में अब तक इंडेक्स करीब एक फीसदी की बढ़त दिखा चुका है, लेकिन लगातार दो महीने की गिरावट के बाद यह तेजी बहुत मजबूत नहीं मानी जा रही.
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा के बाद निफ्टी में तेज उछाल जरूर आया था, लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी. पिछले कई सत्रों से बाजार एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है. रोहित श्रीवास्तव का मानना है कि अगर निफ्टी अपने पुराने ऑल टाइम हाई को पार नहीं कर पाता है, तो ऊपरी स्तरों पर दबाव बना रहेगा. उनके मुताबिक जनवरी में बना टॉप काफी अहम था और उसे पार न कर पाना इस बात का संकेत है कि बाजार में बड़ी तेजी फिलहाल मुश्किल है.
सरकार बढ़ाए खर्च तो पहुंच सकते हैं 30,000 तक
श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि 2025 की आखिरी तिमाही में जो टेक्निकल पैटर्न बना था, वह आने वाले साल के लिए एक अहम टॉप की ओर इशारा करता है. ऐसे में निवेशकों को बहुत ज्यादा अग्रेसिव होने से बचना चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ब्याज दरों में बड़ी कटौती होती है और सरकार पूंजीगत खर्च तेजी से बढ़ाती है, तो निफ्टी 30,000 के स्तर की ओर भी बढ़ सकता है. लेकिन मौजूदा हालात में इसकी संभावना कम नजर आती है.
रोहित श्रीवास्तव के मुताबिक अगर बहुत ज्यादा सरकारी खर्च और तेज ब्याज दर कटौती की जाती है, तो इसका असर बॉन्ड और करेंसी मार्केट पर पड़ सकता है, जो नई परेशानियां खड़ी कर सकता है. इसलिए नीतिगत स्तर पर बहुत संतुलन बनाकर चलने की जरूरत है.
कौन से सेक्टर बेहतर?
सेक्टोरल नजरिए से देखें तो श्रीवास्तव बैंकिंग सेक्टर को लेकर तुलनात्मक रूप से सकारात्मक नजर आते हैं. उनका कहना है कि 2025 में बैंकिंग सेक्टर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों में रहा है. इस सेक्टर में वैल्यू नजर आती है, इसलिए जरूरी नहीं कि बैंकिंग शेयर बाकी बाजार के साथ उतनी ही तेजी से गिरें. बैंकिंग शेयर कुछ समय तक ऊंचे स्तरों पर टिके रह सकते हैं.
इसके अलावा उन्होंने शुगर सेक्टर पर भी ध्यान देने की सलाह दी है. उनका मानना है कि जिन सेक्टरों में लंबे समय से मार पड़ी है, वहां अब वैल्यू बन रही है. शुगर शेयर ऐसे ही सेगमेंट में आते हैं. अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें कई साल के निचले स्तर पर हैं, ऐसे में आने वाले समय में शुगर साइकल पलट सकता है और इस सेक्टर में धीरे-धीरे जान लौट सकती है.
करेंसी मार्केट की बात करें तो रोहित श्रीवास्तव ने डॉलर के मुकाबले रुपये को लेकर भी अहम संकेत दिए हैं. उनका कहना है कि 90 का स्तर डॉलर-रुपया के लिए मजबूत सपोर्ट है. अगर रुपया इस स्तर से नीचे नहीं जाता है, तो आने वाले एक-दो साल में यह 98 तक कमजोर हो सकता है. इसका सीधा असर विदेशी निवेश, महंगाई और बाजार की धारणा पर पड़ सकता है. कुल मिलाकर बाजार के लिए आने वाला समय आसान नहीं दिख रहा है. वैश्विक संकेत, तकनीकी पैटर्न और सेक्टोरल चाल सभी निवेशकों को सतर्क रहने का संदेश दे रहे हैं.
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