आज निफ्टी आईटी इंडेक्स में 4.75% की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई, जिससे इस सप्ताह की कुल गिरावट 10.8% तक पहुंच गई है. यह मार्च 2020 के बाद आईटी सेक्टर के लिए सबसे खराब सप्ताह साबित हो रहा है. इस गिरावट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल तीन दिनों के भीतर आईटी इंडेक्स लगभग 10% से अधिक टूट चुका है. साल 2026 की शुरुआत से अब तक यह सेक्टोरल इंडेक्स 17% तक लुढ़क चुका है. इतनी बड़ी बिकवाली ने तेजी के पक्षधर निवेशकों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है.
एआई (AI) और एंथ्रोपिक ने दिया जोरदार झटका
भारतीय आईटी कंपनियों के लिए सबसे बड़ा खतरा उभरती हुई तकनीक, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से माना जा रहा है. गिरावट की असली शुरुआत 4 फरवरी को हुई, जब एआई स्टार्टअप ‘एंथ्रोपिक’ ने अपने उन्नत एआई मॉडल ‘क्लॉड’ (Claude) का नया संस्करण लॉन्च किया. यह टूल कोडिंग, डेटा विश्लेषण और वित्तीय कार्यों को बहुत ही सटीकता और कम समय में करने में सक्षम है.
भारतीय आईटी कंपनियों का पारंपरिक बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से ‘श्रम-आधारित’ (Labor-based) है, जहां बड़ी संख्या में इंजीनियर नियमित कोडिंग और मेंटेनेंस का काम करते हैं. एआई आधारित ऑटोमेशन से यह आशंका गहरा गई है कि अब कंपनियों को इन कार्यों के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता कम होगी, जिससे उनके राजस्व और मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा. बाजार इसे ‘एंथ्रोपिक झटका’ कह रहा है, क्योंकि यह तकनीक सॉफ्टवेयर सेवाओं की पूरी परिभाषा को बदल सकती है.
टीसीएस और इंफोसिस में जोरदार गिरावट
13 फरवरी को इन्फोसिस (Infosys) के शेयरों में 6.28% की भारी गिरावट देखी गई. एआई के बढ़ते प्रभाव से सबसे ज्यादा खतरा इन्फोसिस जैसी कंपनियों के सर्विस मॉडल को माना जा रहा है. टीसीएस (TCS) के शेयर भी 4.88% तक लुढ़क गए. एचसीएल टेक (HCL Tech) में 4.66% की गिरावट दर्ज की गई. इन बड़ी कंपनियों के अलावा मध्यम और छोटी आईटी कंपनियों में भी भारी बिकवाली का माहौल है.
अमेरिकी बाजार और वैश्विक संकेतों का असर
भारतीय आईटी कंपनियों का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोपीय बाजारों से आता है. गुरुवार को अमेरिका का टेक-हैवी इंडेक्स ‘नैस्डैक’ 2% से अधिक गिर गया, जिसका असर शुक्रवार को भारतीय बाजार पर भी दिखा. अमेरिका में उम्मीद से बेहतर आए रोजगार आंकड़ों ने ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदों को धराशायी कर दिया है. जब तक ब्याज दरें ऊंची रहेंगी, अमेरिकी कंपनियां अपने आईटी बजट में कटौती जारी रख सकती हैं. इसका असर भारतीय कंपनियों को मिलने वाले नए ऑर्डर्स में कमी आएगी. इसके अलावा, शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों से पहले निवेशकों ने सावधानी बरतते हुए आईटी शेयरों से हाथ खींचना ही बेहतर समझा.
आईटी शेयरों में क्या आगे भी जारी रहेगी गिरावट
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, बाजार फिलहाल एक बेहद अस्थिर दौर से गुजर रहा है. उनका कहना है कि अमेरिकी बाजार में एआई शेयरों में करेक्शन की आशंका तो थी, लेकिन इसकी टाइमिंग और प्रभाव का क्षेत्र इतना बड़ा होगा, यह स्पष्ट नहीं था. भारतीय बाजार के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि आईटी सेक्टर भारत के कॉर्पोरेट जगत का दूसरा सबसे बड़ा मुनाफा पूल है.
रिलायंस ब्रोकिंग के रिसर्च के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने कहा, “आईटी शेयरों में तेज गिरावट से फिलहाल तेजी के पक्षधर निवेशक बैकफुट पर आ गए हैं. वैश्विक अस्थिरता के बीच आईटी स्टॉक्स में भारी बिकवाली से बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है.” एआई का वास्तविक प्रभाव भारतीय कंपनियों पर कितना होगा, यह स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने में समय लगेगा. हालांकि, लघु अवधि (Short-term) में वैश्विक अस्थिरता और एआई के डर से बाजार पर दबाव बना रह सकता है.
(Disclaimer: यहां बताए गए स्टॉक्स ब्रोकरेज हाउसेज की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह की लाभ या हानि के लिए लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)
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